‘बच्चों का चरित्र…..’, ये क्या कह गए कैलाश विजयवर्गीय; बयान से मचा घमासान

‘बच्चों का चरित्र…..’, ये क्या कह गए कैलाश विजयवर्गीय; बयान से मचा घमासान


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Kailash Vijayvargiya: मध्य प्रदेश के कैलाश विजयवर्गीय हमेशा से ही अपने बेबाक बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं. अब इंदौर के वैष्णव विद्यापीठ विश्व विद्यालय में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक सरगर्मियां जरूर बढ़ा दी हैं.

कैलाश विजयवर्गीय

रिपोर्ट-मिथिलेश गुप्ता/इंदौर

Kailash Vijayvargiya Statement:  मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. एक निजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में स्कूली शिक्षा और बच्चों के चरित्र निर्माण पर बोलते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने ऐसा उदाहरण दे दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी.

कैलाश विजयवर्गीय ने कही ये बात
मंच से संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा बच्चा स्कूल में चार घंटे रहता है. 20 घंटे घर में रहता है. घर में माहौल कैसा है. अगर माता-पिता घर में अपने दोस्तों के साथ उसके सामने पार्टी करेंगे, तो स्कूल में चार घंटे कितना भी ज्ञान मिले. चरित्र एकता की बात करूं, तो घर में जो वह देखता है, वह सीखेगा. अगर बाप PWD मिनिस्टर हैं और बेटे को कपड़े ठेकेदार दिलवाएं, तो फिर ऐसे में चरित्र निर्माण कैसे होगा. उनका यह बयान सामने आते ही कार्यक्रम के बाहर तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी.

गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलप्रदाय को लेकर हुए कांड के दौरान मीडिया के सवालों पर मंत्री विजयवर्गीय द्वारा ‘घंटा’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी खासा विवाद हुआ था. उस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं और विपक्ष ने मंत्री की भाषा और गरिमा पर सवाल खड़े किए थे. इन्हीं विवादों के बीच पारिवारिक शोक के चलते वह कुछ दिनों की छुट्टी पर भी रहे.

चर्चा में कैलाश विजयवर्गीय का नया बयान
अब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नया बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है. उनका कहना था कि वे उदाहरण के माध्यम से बच्चों में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी की बात कर रहे थे, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे सीधे संदर्भ ने बयान को संवेदनशील बना दिया.

गौरतलब है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बयानों के लिए पहले भी जाने जाते रहे हैं. लेकिन सवाल यही है कि क्या इस तरह के उदाहरण जनता को संदेश देते हैं या फिर सियासी तूफान खड़ा करने का काम करते हैं. फिलहाल इतना तय है कि यह बयान आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रहेगा.

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