नई दिल्ली. विशाखापट्टनम में जैसे भारतीय टीम हारी फैंस उस ऑलराउंडर की खोज में लग गए जो पिछले कई महीने से टीम का संकटमोचक रहा है. भारतीय ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस इस समय भारतीय क्रिकेट फैंस और टीम मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है. आगामी T20 वर्ल्ड कप 2026, जो 7 फरवरी से शुरू हो रहा है, से ठीक पहले सुंदर की चोट ने टीम इंडिया की रणनीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
BCCI के एक सूत्र ने साफ कहा कि वॉशिंगटन की चोट को पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से ठीक होने दिया जा रहा है. जब तक वह पूरी तरह फिट नहीं होते, उन्हें रिटर्न-टू-प्ले प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा.
सूत्र ने यह भी संकेत दिए कि टीम इंडिया जरूरत पड़ी तो अंतिम चरणों तक इंतज़ार कर सकती है. अगर वॉशिंगटन वर्ल्ड कप के बाद के मुकाबलों तक फिट हो सकते हैं, तो टीम उनके लिए इंतज़ार कर सकती है.
फिटनेस टेस्ट और वर्ल्ड कप का आगाज
वॉशिंगटन सुंदर का महत्वपूर्ण फिटनेस टेस्ट 4 फरवरी को बेंगलुरु स्थित BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में होगा. यह टेस्ट टूर्नामेंट शुरू होने से महज तीन दिन पहले निर्धारित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि चयनकर्ता उन्हें मौका देने के लिए अंतिम समय तक इंतजार करने को तैयार हैं. सुंदर 11 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे मैच के दौरान साइड स्ट्रेन (पसलियों में खिंचाव) का शिकार हुए थे और तब से वह मैदान से दूर हैं.
30 जनवरी की समय-सीमा और रिप्लेसमेंट का पेंच
ICC के नियमों के अनुसार, सभी टीमों के पास अपनी टीम में बदलाव करने के लिए 30 जनवरी तक का समय है. इस तारीख के बाद, किसी भी खिलाड़ी को बदलने के लिए ICC की ‘इवेंट टेक्निकल कमेटी’ से विशेष अनुमति लेनी होगी, जो आमतौर पर केवल गंभीर चोट के मामलों में ही मिलती है. ऐसे में भारतीय चयनकर्ताओं के लिए यह किसी ‘डेडलाइन’ से कम नहीं है. यदि 30 जनवरी तक सुंदर की रिकवरी पर कोई स्पष्टता नहीं आती, तो टीम को रवि बिश्नोई या रियान पराग जैसे स्टैंडबाय खिलाड़ियों को आधिकारिक स्क्वाड में शामिल करने पर विचार करना पड़ सकता है.
सुंदर का टीम में होना क्यों है जरूरी?
वॉशिंगटन सुंदर की उपयोगिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. वह न केवल पावरप्ले में कसी हुई स्पिन गेंदबाजी करते हैं, बल्कि निचले क्रम में एक भरोसेमंद बल्लेबाज भी हैं. सुंदर की मौजूदगी टीम को एक अतिरिक्त स्पिन विकल्प और बैटिंग गहराई प्रदान करती है, जो भारतीय और श्रीलंकाई पिचों पर बेहद कारगर साबित हो सकती है. नई गेंद के साथ विकेट चटकाने और रन रोकने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य स्पिनरों से अलग बनाती है.
भारतीय टीम मैनेजमेंट इस समय “वेट एंड वॉच” की नीति अपना रहा है हालांकि, सुंदर ने नेट पर बल्लेबाजी शुरू कर दी है, लेकिन पसलियों के क्षेत्र में अभी भी दर्द की खबरें आ रही हैं. 30 जनवरी की तारीख करीब है और 4 फरवरी का टेस्ट उनका भविष्य तय करेगा. टीम इंडिया के लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा कि वे बिना पूरी तरह फिट सुंदर के साथ जोखिम उठाएं या समय रहते रिप्लेसमेंट का ऐलान करें.