आगर मालवा शहर के वार्ड क्रमांक 9 में वर्षों पुराने गांधी चबूतरे के जीर्णोद्धार की अनुमति न मिलने से नाराज वाल्मीकि समाज ने अब आंदोलन कर रहा है। शुक्रवार को समाज के पदाधिकारियों ने गांधी उपवन में एक दिवसीय उपवास रखा। समाजजनों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते उनकी धार्मिक और सामाजिक परंपराओं के निर्वहन में बाधा आ रही है। 77 साल पहले आवंटित हुई थी जमीन, अब जर्जर हुआ चबूतरा प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचे वार्ड पार्षद शमीउल्ला कुरैशी ने बताया कि साल 1949 में वाल्मीकि पंचायत को मालिपुरा क्षेत्र में करीब 1250 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन सांध्यकालीन स्कूल चलाने और गांधी चबूतरे के निर्माण के लिए दी गई थी। दशकों पुराना यह चबूतरा अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। समाज पिछले तीन सालों से इसके नए निर्माण की अनुमति के लिए नगर पालिका के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उनके आवेदन को खारिज कर दिया जाता है। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग विरोध स्वरूप समाज के महेश नरवाल और इंदुबाला बिलरवान सुबह से ही उपवास पर बैठे रहे। शाम को पार्षद शमीउल्ला कुरैशी, कमल जाटव और अन्य जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर समाजजनों को समर्थन दिया और जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। पार्षदों ने प्रशासन से अपील की है कि यह समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा मामला है, इसलिए तकनीकी अड़चनों को दूर कर जल्द से जल्द निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए। तीन साल से भटक रहे समाजजन वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी नई जमीन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी आवंटित भूमि पर ही जर्जर ढांचे को सुधारना चाहते हैं। प्रशासन द्वारा बार-बार आवेदन निरस्त किए जाने से समाज में काफी आक्रोश है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थाई समाधान नहीं निकाला गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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