Hybrid Cars मौजूदा समय में काफी ज्यादा पॉपुलर हो रही हैं. लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और आसमान छू रहे पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच हाइब्रिड इंजन काफी बेहतर ऑप्शन बनकर उभरा है. ये कारें पेट्रोल या डीजल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर को जोड़कर बेहतर माइलेज और कम एमीशन प्रदान करती हैं।
इन्हें मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा गया है. इसमें माइल्ड हाइब्रिड (MHEV), फुल हाइब्रिड (HEV) और प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) का नाम शामिल है. इनकी तकनीक अलग-अलग होती है, जो आपकी ड्राइविंग स्टाइल, बजट और जरूरतों पर निर्भर करती है. आइए विस्तार से समझते हैं कि कौन सी टेक्नोलॉजी वाली कार आपके लिए सही हो सकती है.
माइल्ड हाइब्रिड (MHEV)
सबसे पहले बात माइल्ड हाइब्रिड (MHEV) की करते हैं. ये हाइब्रिड कारों का सबसे बेसिक रूप है, जहां एक छोटी इलेक्ट्रिक बैटरी और मोटर मेन इंजन को असिस्ट करती है. इलेक्ट्रिक मोटर इंजन को स्टार्ट करने, एक्सेलरेशन में मदद करने और ब्रेकिंग के दौरान एनर्जी रिजेनरेट करने का काम करती है.
हालांकि, ये कार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोड पर नहीं चल सकती. फायदे की बात करें, तो ये कम कीमत (सामान्य कारों से 10-20% महंगी), बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी (5-15% बचत) और आसान मेंटेनेंस वाली होती हैं. कमी में सीमित इलेक्ट्रिक रेंज है. ये गाड़ी उन लोगों के लिए बेहतर है, जो शहर में कम दूरी तय करते हैं और बजट में रहकर फ्यूल बचाना चाहते हैं. अगर आपका डेली रन 50 किमी से कम है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, तो ये परफेक्ट ऑप्शन हो सकती है.
विकल्प आदर्श है।
फुल हाइब्रिड (HEV)
अब फुल हाइब्रिड (HEV) पर नजर डालते हैं. ये अधिक एडवांस्ड है, जहां कार इलेक्ट्रिक मोटर पर अकेले चल सकती है, खासकर कम स्पीड पर या ट्रैफिक में ये बेहतर हैं. इंजन और मोटर दोनों एक साथ या अलग-अलग काम करते हैं और बैटरी ब्रेकिंग से चार्ज होती है. फायदे में हाई माइलेज (30-50 किमी/लीटर तक), कम एमीशन और स्मूद ड्राइविंग शामिल है. हालांकि, इसकी शुरुआती कीमत आपको ज्यादा लग सकती है.
प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV)
तीसरा और सबसे कारगर ऑप्शन प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) है. येफुल हाइब्रिड से एक कदम आगे है, जहां बड़ी बैटरी को घर पर या चार्जिंग स्टेशन पर प्लग इन करके चार्ज किया जा सकता है. इलेक्ट्रिक रेंज 30-80 किमी तक होती है, उसके बाद ये HEV की तरह काम करती है. फायदों में शॉर्ट ट्रिप्स पर जीरो एमीशन, टैक्स इंसेंटिव और हाई एफिशिएंसी शामिल है. हालांकि, ये हैवी वेट के साथ महंगी होती हैं और इन्हें चार्ज करने की जरूरत भी पड़ती है.
इसके अलावा हाइब्रिड कारों को सीरीज और पैरेलल में भी बांटा गया है. सीरीज हाइब्रिड में इंजन केवल बैटरी चार्ज करता है, जबकि पैरेलल में दोनों व्हील्स को पावर देते हैं. टोयोटा का सिस्टम सीरीज-पैरेलल का कॉम्बिनेशन है. रेंज-एक्सटेंडेड EV (REEV) PHEV जैसा है लेकिन इंजन सिर्फ जेनरेटर की भूमिका निभाता है.
कुल मिलाकर, हाइब्रिड कारें ईंधन की बचत और पर्यावरण सुरक्षा का बेहतरीन मिश्रण हैं. 2026 में भारत में टोयोटा, होंडा और हुंडई जैसी कंपनियां इन मॉडल्स को प्रमोट कर रही हैं. हालांकि, इनमें से किसी एक का चुनाव आपकी लाइफस्टाइल और बजट पर निर्भर करेगा. इंडियन मार्केट में सबसे ज्यादा Strong Hybrid Cars ही सेल की जाती हैं.