खुद नहीं देख पाते दुनिया, लेकिन बच्चों को दिखा रहे उजला भविष्य, नंदराम बने सैकड़ों बच्चों की उम्मीद

खुद नहीं देख पाते दुनिया, लेकिन बच्चों को दिखा रहे उजला भविष्य, नंदराम बने सैकड़ों बच्चों की उम्मीद


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Visually Impaired Nandram Awache: एमपी के खंडवा के शासकीय हाई स्कूल पदम नगर में पदस्थ दृष्टिबाधित शिक्षक नंदराम जी आवचे सालों से छठवीं और सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ पढ़ा रहे हैं. न देख पाने के बावजूद वे सैकड़ों बच्चों के भविष्य को उजाला दिखा रहे हैं और यह साबित करते हैं कि असली ताकत इरादों में होती है.

Visually Impaired Nandram Awache: कहते हैं अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कमजोरी रास्ता नहीं रोक सकती. खंडवा शहर में एक ऐसे ही शिक्षक हैं, जो खुद इस दुनिया को देख नहीं सकते, लेकिन सैकड़ों बच्चों के भविष्य को रोशनी दिखा रहे हैं. यह कहानी है खंडवा जिले के शासकीय हाई स्कूल पदम नगर में पदस्थ दृष्टिबाधित शिक्षक नंदराम जी आवचे की है. नंदराम जी की दोनों आंखें नहीं हैं, इसके बावजूद वे वर्षों से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. वे आम शिक्षकों की तरह ही कक्षा में पहुंचते हैं, बच्चों से संवाद करते हैं, सवाल पूछते हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ाते हैं. उन्हें देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि वे नेत्रहीन हैं. शासकीय हाई स्कूल पदम नगर में नंदराम जी छठवीं और सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं. छठवीं कक्षा में उनकी तीन पीरियड लगती हैं, जहां वे सामाजिक विज्ञान और हिंदी जैसे विषय पढ़ाते हैं. बच्चों के बीच उनकी अलग पहचान है- अनुशासन, सरल समझाने की शैली और अपनापन.

Local 18 से बातचीत में नंदराम जी आवचे बताते हैं कि मैं पूरी तरह से नेत्रहीन हूं, लेकिन मैंने इतिहास विषय से एमए किया है. मेरी नौकरी 2 सितंबर 1993 को लगी थी. पहली पोस्टिंग शासकीय मोतीलाल नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खंडवा में हुई थी. इसके बाद 10 अक्टूबर 1994 से मैं शासकीय हाई स्कूल पदम नगर में लगातार सेवा दे रहा हूं. वे बताते हैं कि पढ़ाने के तरीके में सिर्फ लिपि का अंतर है. सामान्य बच्चे देवनागरी लिपि से पढ़ते हैं, जबकि मैं ब्रेल लिपि से पढ़ता हूं. मेरी सारी किताबें ब्रेल लिपि में होती हैं और वही पाठ्यक्रम बच्चों की किताबों में भी होता है.

नंदराम ने कैसे की पढ़ाई?
नंदराम जी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. उन्होंने बताया कि जब वे सिर्फ 4 साल के थे, तभी आंखों की गंभीर बीमारी के कारण उनकी रोशनी चली गई.  इसके बाद उनके पिता मांगीलाल आवचे उन्हें गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने ले गए, लेकिन वहां शिक्षक ने प्रवेश देने से मना कर दिया. इसके बाद मां सजन बाई मजदूरी करने खंडवा आ गईं. एक दिन उनकी मुलाकात एक समाजसेवी महिला से हुई, जिन्होंने नंदराम को मध्य प्रदेश दृष्टिहीन कल्याण संघ, किला मैदान इंदौर में भर्ती कराया. वहीं से उन्होंने ब्रेल लिपि के माध्यम से आठवीं तक की पढ़ाई पूरी की और आगे की शिक्षा हासिल कर शिक्षक बनने का सपना साकार किया.

स्कूल की प्राचार्य प्रतिभा दीक्षित कहती हैं कि नंदराम जी पूरी तरह दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उनका आत्मविश्वास और समर्पण अद्भुत है. उनके पढ़ाए हुए कई विद्यार्थी आज अच्छे पदों पर हैं. वे खुद भले न देख पाते हों, लेकिन बच्चों को आगे बढ़ने की रोशनी जरूर देते हैं. वहीं, उनके साथी शिक्षक मनीष मंडलोई, जो पिछले 11 वर्षों से उनके साथ कार्य कर रहे हैं और बताते हैं कि हमारा रिश्ता अब सिर्फ सहकर्मी का नहीं रहा, बल्कि आत्मीय मित्रता में बदल चुका है. उनकी मेमोरी इतनी तेज है कि एक बार मोबाइल नंबर बता दो, तो पूरा याद हो जाता है. पढ़ाने में वे कई सामान्य शिक्षकों से भी आगे हैं. नंदराम जी आवचे आज समाज के लिए एक मिसाल हैं. वे यह साबित करते हैं कि असली रोशनी आंखों में नहीं, बल्कि हौसले और सोच में होती है. खुद अंधेरे में रहते हुए भी वे हर दिन बच्चों के जीवन को उजाले से भर रहे हैं.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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जहां देखना मुमकिन नहीं, वहां सिखाना आसान नहीं, फिर भी नंदराम ने दिखाया कमाल



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