125 साल पुरानी रामलीला, विश्वयुद्ध-कोरोना में भी नहीं रुकी: नौवीं में सीता, 12वीं में पढ़ते हैं राम; पूर्व राष्ट्रपति-मुख्यमंत्री कर चुके अभिनय – Vidisha News

125 साल पुरानी रामलीला, विश्वयुद्ध-कोरोना में भी नहीं रुकी:  नौवीं में सीता, 12वीं में पढ़ते हैं राम; पूर्व राष्ट्रपति-मुख्यमंत्री कर चुके अभिनय – Vidisha News




एक ऐसी रामलीला जिसे न हिटलर का विश्वयुद्ध रोक पाया, न कोरोना का लॉकडाउन। यह अंग्रेजों की गोलियों से भी नहीं डरी। मशालों से शुरू हुई और अब स्मार्टफोन की फ्लैश लाइट तक पहुंच गई है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के विदिशा के मेला ग्राउंड में 125 साल पहले शुरू हुई ‘चलित रामलीला’ की। यह भारत की शायद इकलौती ऐसी मूविंग थिएटर है, जिसमें बेबी बूमर्स से लेकर जेन-जी और जनरेशन अल्फा तक…यानी चार पीढ़ियां भूमिका निभाती आ रही हैं। यहां लोग मूवी, सीरीज छोड़कर, दफ्तरों से छुट्टी लेकर अपना किरदार जीने आते हैं। इतना ही नहीं, इस रामलीला में पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री तक अभिनय कर चुके हैं। 27 दिन तक चलने वाली इस रामलीला को कवर करने दैनिक भास्कर की टीम विदिशा पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… जानिए क्यों खास है यह रामलीला हिटलर का विश्वयुद्ध भी नहीं रोक पाया
रामलीला के लिए एक रजिस्टर्ड सभा भी बनाई गई है। इसके उपाध्यक्ष कीर्ति प्रकाश शर्मा ने बताया कि यह चलित रामलीला स्वर्गीय विश्वनाथ शास्त्री की अध्यक्षता में साल 1901 में शुरू की गई थी। उस समय बिजली नहीं हुआ करती थी, ऐसे में रामलीला मशालों के उजाले में की जाती थी। इस रामलीला को लेकर लोगों में बड़ा उत्साह रहता है। कीर्ति प्रकाश शर्मा ने बताया कि रामलीला जब से शुरू हुई है, तब से एक भी बार नहीं रुकी। विश्वयुद्ध के समय और कोरोना के समय लगाए गए लॉकडाउन में भी रामलीला की प्रस्तुति की गई। इसे देखने और अभिनय करने बढ़-चढ़कर इसमें सहभागिता करने आते हैं। रामलीला में यह खास बात
चार पीढ़ियां करती आ रहीं अभिनय
उपाध्यक्ष कीर्ति प्रकाश शर्मा के परिवार की चौथी पीढ़ी रामलीला में भूमिका अदा करती आ रही है। उनके पिता ने 74 साल तक इसमें अपना अभिनय किया। कीर्ति शर्मा खुद 35 साल से अभिनय करते आ रहे हैं। उनका बेटा 4 साल की उम्र से और अब पोता भी इसमें भूमिका निभाता है। कीर्ति प्रकाश शर्मा के भाई एनपी शर्मा ने भी 44 साल तक अभिनय किया। हैदराबाद से आते हैं बेटा और पोता
उनका बेटा वैभव शर्मा (43) हैदराबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वह चार साल से रामलीला में अलग-अलग पात्र बन रहे हैं। वहां से 4-5 दिन की छुट्टी लेकर वह हर साल अपना किरदार निभाने आते हैं। उनका बेटा प्रभाव शर्मा (9 साल) भी भूमिका निभाता है।
सिर्फ कीर्ति शर्मा ही नहीं, उनकी तरह और भी लोग हैं, जो अपनी नौकरी और काम छोड़कर रामलीला में आते हैं। रजिस्टर्ड सभा के सचिव ने बताया कि रेलवे में सेवाएं देते हुए रमेश व्यास भी रामलीला में अभिनय के लिए विदिशा आया करते थे। वह गरुण की भूमिका निभाते थे। वहीं एक और अन्य व्यक्ति बैतूल में जज रहते हुए रामलीला में अभिनय करने को आते रहे। पूर्व राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री और मंत्री कर चुके अभिनय
12वीं में पढ़ते हैं राम, सीता नौवीं में
‘चलित रामलीला’ में अभिनय करने को लेकर लोगों में शुरुआत से ही उत्साह रहता है। आयोजकों के पास 100 से ज्यादा पात्रों की ड्रेस हैं। वानर का रोल करने तक के लिए लोग बड़ी रुचि से आते हैं। यहां पंडिस चंद्र व्यास लगभग 45 साल से भगवान राम के गुरु वशिष्ठ के रूप में, पंडित हरिशंकर शास्त्री (67) 10 साल की उम्र से अभिनय कर रहे हैं। वहीं फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाले मंथन पाठक चार साल की उम्र से अभिनय कर रहे हैं। वह इस बार भरत की भूमिका में हैं। कक्षा 12 में पढ़ने वाले कृष्णा राम बने हैं। कक्षा 9 में पढ़ने वाले ध्रुव भार्गव सीता माता की भूमिका में हैं। जानें क्या कहते हैं किरदार कॉलेज में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट मंथन पाठक ने बताया- मैं 14 सालों से भूमिका करते आ रहा हूं। अबकी मुझे भरत का किरदार निभाने का सौभाग्य मिला है। मेरी मां देवी, मामा हनुमान जी के पुत्र मकर मकरध्वज बन चुके हैं। नानाजी अभी प्रधान संचालक हैं। रामलीला में हमारा परिवार पीढ़ियों से जुड़ा है। आगे में जैसा राम जी चाहेंगे, वैसी ही उनकी सेवा करते रहेंगे। बलराम शर्मा संस्कृत आचार्य हैं। उन्होंने बताया- मैं 8 साल से रामलीला में पात्र बनते आया हूं। एक बार राजा जनक, भरत बन चुका। अबकी बार एक राजा बना हूं। राजा दशरथ की अंत्येष्टि में शामिल होऊंगा। दोपहर में 2 बजे मेरी छुट्टी होने के बाद मैं यहां अभ्यास के लिए आता हूं। अब जानिए किस तरह से होती हैं तैयारियां
आयोजकों ने बताया शुरुआत में पहले रामलीला 10 दिन की होती थी। समय के साथ अब यह 27 दिन की हो चुकी है। रामलीला में अभिनय करने वाला कोई भी पात्र रुपए नहीं लेता। सभी अपने अपने कामों से समय निकालकर ट्रेनिंग में शामिल होने आते हैं। सभी पात्रों की ट्रेनिंग 15 दिसंबर से चालू होती है। डेढ़ महीने से तैयारी चलती है। इस दौरान पात्रों को बोलने, चलने, खड़े होने बैठने समेत कई चीजों की प्रैक्टिस करनी होती है। उसके बाद सभी रामलीला में शामिल होते हैं। जब तक रामलीला चलती है इसके पात्र बाजार का कुछ भी नहीं खाते। मुख्य पात्रों के लिए शुद्ध आहार लेना होता है। कोई भी धूम्रपान नहीं करता। नेचुरल रंगों से होता है किरदारों का श्रृंगार
पंडित विशाल चतुर्वेद बताते हैं कि उनके दादा जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी रामलीला के किरदारों का श्रृंगार करते थे। उनके बाद पिता रुद्रेश चतुर्वेदी करते थे और अब वह कर रहे हैं। हम प्रतिदिन 30 लोगों का श्रृंगार करते हैं। तीन तस्वीरें देखिए… गांवों से रामलीला देखने पहुंचते हैं लोग
मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले मेले के समय ‘चलित रामलीला’ होती है। 300 बाई 280 एरिया में 32 कैमरों से पूरे परिसर की निगरानी होती है। स्टेडियम में 20 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है। विदिशा शहर समेत आसपास के लोग भी रामलीला मेले में आते हैं। विदिशा के सकलदीप ठाकुर 40 साल से रामलीला देखने पहुंचते हैं। विदिशा की शांति बाई 50 साल से रामलीला देखने आ रही हैं। ग्राउंड में चलती रामलीला को देखने में उन्हें आनंद आता है।



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