सीतामऊ स्थित नटनागर शोध संस्थान में 29 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का शुक्रवार को सफल, गरिमामय और भव्य समापन हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से आए साहित्यकारों, विचारकों, इतिहासकारों, कलाकारों और पर्यावरणविदों ने व्याख्यान, संवाद और प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रोताओं को वैचारिक रूप से समृद्ध किया। महोत्सव में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, साहित्यप्रेमी और आम नागरिक शामिल हुए। ऐसा रहा तीन दिन का आयोजन
महोत्सव को एक “नॉलेज कुंभ” के रूप में देखा गया, जहां साहित्य, इतिहास, पर्यावरण, सिनेमा और संस्कृति जैसे विषयों पर संवाद हुआ। पद्मश्री साहित्यकार ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि कविता और रचना वही सार्थक होती है, जिसमें लेखक की अनुभूति और संवेदना शामिल हो। उन्होंने सरल और बोलचाल की भाषा को लेखन की आत्मा बताया। पर्यावरणविद रज़ा काज़मी ने पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए इतिहास के उदाहरण दिए और बच्चों से प्रकृति के करीब रहने का आह्वान किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता जेरी पिंटो ने कहा कि अंग्रेज़ी के साथ हिंदी पढ़ना भी जरूरी है, ताकि सांस्कृतिक जड़ें मजबूत रहें। विचार, अनुभव और प्रेरणा
मुजतबा खान ने “दादी-नानी के किस्से” के माध्यम से समाज में भाषा, तहज़ीब और संस्कारों की भूमिका बताई। फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता प्रशांत पांडे ने “सुवासरा से फिल्मफेयर तक” विषय पर अपने संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा की। कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने वाले स्कूली विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। समापन पर वक्ताओं के विचार
सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कहा कि नटनागर शोध संस्थान एशिया की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है और यह आयोजन ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने इसे सीतामऊ को नई पहचान देने वाला आयोजन बताया। कलेक्टर अदिति गर्ग ने कहा कि महोत्सव की जड़ें अब मजबूत हो चुकी हैं और यह भविष्य में एक वृहद वृक्ष का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि इस मंच से स्थानीय संस्कृति और राष्ट्रीय स्तर के विचारों का सुंदर समन्वय हुआ। ये रहे उपस्थित
समापन अवसर पर कलेक्टर अदिति गर्ग, सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला, जिला योजना समिति सदस्य अनिल पांडे सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यप्रेमी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
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