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Early Watermelon Farming: सर्दियों में की गई अगेती तरबूज की खेती किसानों के लिए मुनाफे का बेहतरीन जरिया बन रही है. जनवरी से फरवरी के बीच सही तकनीक से बुवाई करने पर फसल गर्मी की शुरुआत में तैयार हो जाती है. इस समय बाजार में मांग अधिक और आवक कम रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और कम समय में अच्छी आमदनी होती है.
Watermelon Farming: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में तरबूज की खेती पिछले कुछ वर्षों में किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है. खासतौर पर बाणसागर डूब क्षेत्र की खाली पड़ी जमीन में बड़े पैमाने पर अगेती तरबूज की खेती की जा रही है. फरवरी का महीना इसकी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को बताया, अगेती तरबूज की खेती सर्दियों के अंत में की जाती है. फरवरी तक बुवाई करने पर फसल गर्मी की शुरुआत में ही तैयार हो जाती है.
इस समय बाजार में तरबूज की आवक कम होती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।अवनीश बताते हैं, अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे अहम चरण है. बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद, जैविक खाद और ट्राइकोडर्मा मिलाना चाहिए. इसके बाद 2-3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है, जिससे उर्वरक क्षमता बढ़ती है और पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं. तरबूज की खेती के लिए बलुई-दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए.
जानें बुवाई का सही तरीका
खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था बेहद जरूरी है. जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं और पूरी फसल खराब होने का खतरा रहता है. इसी कारण किसानों की मेड़ों पर ही बीज या पौध की बुवाई करने की सलाह दी जाती है. इससे अधिक पानी होने पर भी पौधे सुरक्षित रहते हैं. तरबूज की बुवाई दो तरीकों से की जाती है. पहला तरीका सीधे खेत में बीज बोने का है, जिसमें बाद में निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण के लिए अतिरिक्त मजदूरी लगती है. दूसरा और अधिक लाभकारी तरीका मल्चिंग का है. मल्चिंग से पानी की खपत कम होती है, खरपतवार नहीं उगते और फल साफ-सुथरे व स्वादिष्ट बनते हैं. साथ ही ड्रिप सिंचाई अपनाने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है.
इतनी होगी कमाई
लागत और मुनाफे की बात करें तो एक बीघा में अगेती तरबूज की खेती पर करीब 18 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है. वहीं, सही देखभाल और समय पर बाजार में बिक्री करने पर 70 से 80 हजार रुपये तक का मुनाफा संभव है. यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है, जिससे कम समय में अच्छी कमाई हो जाती है.
इन हाइब्रिड किस्में को बोएं
अवनीश पटेल के मुताबिक HW22, जन्नत और सरस्वती तरबूज की उन्नत हाइब्रिड किस्में किसानों में काफी लोकप्रिय हैं. ये किस्में 50-60 दिन में तैयार हो जाती हैं, गूदा गहरा लाल और मिठास 12-14 प्रतिशत तक होती है. सही तकनीक, मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई के साथ किसान प्रति एकड़ 25 टन तक की बंपर पैदावार लेकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें