नीमच में ओलावृष्टि, सड़कें-खेत सफेद चादर में ढकीं: जीरन-मनासा क्षेत्र में गेहूं, चना, अफीम की फसलों को नुकसान; सर्वे की मांग – Neemuch News

नीमच में ओलावृष्टि, सड़कें-खेत सफेद चादर में ढकीं:  जीरन-मनासा क्षेत्र में गेहूं, चना, अफीम की फसलों को नुकसान; सर्वे की मांग – Neemuch News




नीमच जिले की जीरन और मनासा तहसील के कई गांवों में रविवार को मौसम बदलने से बारिश और ओलावृष्टि हुई। इस बेमौसम बदलाव के कारण खेतों में खड़ी रबी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। ओले गिरने के बाद सड़कों और खेतों में बर्फ की परत जमी नजर आई, जिससे किसान अपनी फसलों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। इन क्षेत्रों में गिरे ओले जानकारी के अनुसार, जीरन तहसील के भंवरासा, पालसोडा, केलुखेड़ा और बामणिया भोपाल गंज में ओलावृष्टि हुई है। वहीं, मनासा तहसील के रूपावास, आकली, आंतरीमाता, लोडकिया और खजूरी गांवों में भी बारिश के साथ ओले गिरे। पालसोडा और भंवरासा में ओलावृष्टि का असर अन्य गांवों की तुलना में अधिक देखा गया। फसलों की स्थिति और नुकसान इस प्राकृतिक आपदा से गेहूं, चना, लहसुन और अफीम की फसलों पर असर पड़ा है। ओले गिरने से अफीम के फूल और डोडे टूट गए हैं, वहीं गेहूं और सरसों की फसलें कई जगहों पर झुक गई हैं। किसानों का कहना है कि अफीम की फसल संवेदनशील होती है, इसलिए ओलों के कारण उसकी औसत उपज कम होने की आशंका है। प्रभावित गांवों के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खेतों का मौका मुआयना (सर्वे) किया जाए और नुकसान का आकलन कर उचित राहत दी जाए। कृषि वैज्ञानिक सीपी पाचौरी ने बताया- अचानक हुई इस ओलावृष्टि से उन फसलों को अधिक नुकसान हुआ है जो कटाई के करीब थीं। धनिया और अफीम जैसी फसलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है।



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