भिंड शहर में यूजीसी कानून के विरोध में रविवार को हड़ताल रही। शहर के प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। एक दर्जन से अधिक सवर्ण संगठनों के पदाधिकारी अलग-अलग बाजार क्षेत्रों में टोलियों के साथ निकले और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कानून वापस लेने की मांग की।
भिंड शहर में रविवार सुबह से ही बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। मेडिकल और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ई-रिक्शा, ऑटो और यात्री बसों का संचालन ठप रहा, जिससे आमजन को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उपभोक्ता भी बाजार बंद होने की जानकारी मिलने पर वापस लौटते नजर आए।
परशुराम सेना, हिंदू सेना, श्रीराम सेना, करणी सेना सहित अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी टोलियों में बाजार क्षेत्रों में पहुंचे, जिसके बाद पूरा शहर लगभग बंद की स्थिति में नजर आया। सदर बाजार, गोल मार्केट, बजरिया, सब्जी मंडी, पुस्तक बाजार, भूंता बाजार और बताशा बाजार में सबसे अधिक असर देखने को मिला, जहां एक भी दुकान नहीं खुली। पुलिस की पेट्रोलिंग जारी
हड़ताल को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में पुलिस ने पेट्रोलिंग की और हड़ताल में शामिल संगठनों की गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। भिंड शहर के अलावा मेहगांव, गोहद, गोरमी, लहार, मिहोना और रौन क्षेत्रों में भी शांतिपूर्ण तरीके से बाजार बंद रहे। व्यापारियों ने भी दिया समर्थन यूजीसी कानून के विरोध में व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। श्रीराम सेना के रिषेंन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा कि यह विरोध समाज में बढ़ती जातिगत असमानता के खिलाफ है। उनका कहना है कि यूजीसी कानून से सामाजिक विभाजन बढ़ेगा और अपराध में वृद्धि की आशंका है।
विरोध में सभी समाज एकजुट हैं परशुराम सेना के जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने कहा कि यूजीसी कानून के विरोध में समाज के सभी वर्ग एकजुट हैं। बिना किसी दबाव के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे हैं, जो यह दर्शाता है कि जनता स्वयं इस कानून के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार से कानून वापस लेने की मांग की।
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