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Ayurvedic Tips: बहेड़ा आयुर्वेद के अचूक इलाज में प्रयोग की जाने वाली जड़ी- बूटियों में से एक है. इसमें रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी बूस्ट करने वाले गुण पाए जाते हैं. इस जड़ी-बूटी का संस्कृत नाम विभीतकी है, जिसे अंग्रेजी में फीयरलेस और हिंदी में ‘निर्भय’ कहते हैं. इसके फायदे आपको चौंका देंगे. जानें एक से बढ़कर एक…
Ayurvedic Tips: आज हम आपको एक ऐसी जड़ी-बूटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो समग्र सेहत के लिए लाभकारी है. ज्यादातर लोग बहेड़ा के फायदों से अनजान हैं. बहेड़ा आयुर्वेद में अचूक इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियों में से एक है. इसमें रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी बूस्ट करने वाले गुण पाए जाते हैं. इस जड़ी-बूटी का संस्कृत नाम विभीतकी है, जिसे अंग्रेजी में फीयरलेस और हिंदी में ‘निर्भय’ कहते हैं. अंग्रेजी में बहेड़ा को टर्मिनलिया बेलिरिका कहा जाता है.
रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के डीन डाॅ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया, कोरोना काल में जब अस्पतालों में बेड्स और ऑक्सीजन की भारी किल्लत से लाखों लोगों को जूझना पड़ रहा था, उस वक्त आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां काफी चर्चा में आई थीं. लाखों लोग आयुर्वेद के देसी नुस्खों के जरिए घर बैठे कोविड से ठीक हुए थे. कोविड के बाद दो बातें देखने को मिली हैं. पहली, लोगों ने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. दूसरी, अब सभी की आयुर्वेद की ओर दिलचस्पी बढ़ने लगी है. साथ ही अब देशवासी पारंपरिक चिकित्सा में प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी जुटाने लगे हैं.
इन रोगों के लिए रामबाण
- डायरिया और बुखार: बहेड़ा कब्ज-दस्त (डायरिया) से लेकर बुखार को कम करने में मददगार है. आयुर्वेद में इस जड़ी-बूटी का प्रयोग सदियों से होता आ रहा है. बहेड़ा आयुर्वेदिक जड़ी बूटी त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं. बहेड़ा शरीर के तीन दोषों जैसे वात, पित्त, कफ को संतुलित करने में सहायक है. आयुर्वेद में बहेड़ा को सेहत संबंधी समस्याएं दूर करने के लिए कारगर माना गया है.
- पेट संबंधी रोगों में कारगर: भारत में डायरिया के मरीजों पर इसका अध्ययन किया गया है, जो प्रभावी माना गया है. ये पेट संबंधी सभी तरह की समस्याओं को दूर करने में असरदार है. बहेड़ा फल का हाइड्रोक्लोरिक अर्क को पेट दर्द, अपच, पेचिश, उल्टी, दस्त, कब्ज और सूजन को कम करने में सहायक बताया गया है. पारंपरिक रूप से इसका उपयोग गैस्ट्रिक अल्सर के प्रबंधन के लिए किया जाता है.
- ब्लड शुगर: बहेड़ा फल का अर्क इंसुलिन के स्तर में सुधार करता है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है. जानवरों पर किए गए अध्ययन में पता चला कि बहेड़ा डायबिटीज के रोगियों के लिए भी प्रभावी है. इसका इस्तेमाल अल्सर के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में भी किया जा सकता है.
- गठिया: बहेड़ा के बीज का तेल गठिया में प्रभावी माना जाता है. इसके अलावा एक अध्ययन में यह भी पता चला कि बहेड़ा किडनी की पथरी के उपचार में असरदार है और यह किडनी के समग्र कार्यों में सुधार कर सकता है. इसके अतिरिक्त ये वजन घटाने और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मददगार है.
- सफेद बाल, खून की कमी, पीलिया: बहेड़ा को सफेद बालों की समस्या को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह हृदय और लीवर के लिए भी फायदेमंद बताया गया है. इस फल की मींगी मोतियाबिंद को दूर करने में मददगार है, जबकि इसकी छाल खून की कमी, पीलिया और कुष्ठ रोग के लिए लाभकारी बताई जाती है.
- खराश: बहेड़े को थोड़े से घी में पकाकर खाने से गला दर्द या खराश जैसे रोग दूर हो जाते हैं.
- आंखों के लिए: बहेड़ा की छाल को मिश्री या शहद के साथ पीने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है. जब कभी आपको आंखों में दर्द हो रहा हो तब भी आप इसे पी सकते हैं.
- जलन: बहेड़े के बीजों पीसकर पानी के साथ पीने से हाथ-पैर की जलन में आराम मिलता है.
- काले बालों के लिए: बहेड़ा का पाउडर और लेप बनाकर बालों की जड़ों पर लगाने से बाल काले हो जाते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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