रविवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) से जुड़े मुद्दों को लेकर रीवा शहर में व्यापक बंद का असर देखने को मिला। दिनभर शहर का जनजीवन प्रभावित रहा। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और आम दिनों में चहल-पहल रहने वाला शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र शिल्पी प्लाजा भी पूरी तरह बंद रहा। यहां अधिकांश दुकानें नहीं खुलीं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां ठप रहीं। UGC को लेकर नाराजगी जताते हुए अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, करणी सेना, वैश्य समाज सहित कई सामाजिक और व्यापारी संगठनों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और UGC से जुड़े निर्णयों को वापस लेने की मांग की। रविवार सुबह विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शहर के अलग-अलग इलाकों में एकत्र हुए और रैली निकालते हुए प्रमुख मार्गों से गुजरे। रैली के दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए और हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि UGC से संबंधित प्रस्तावों से उच्च शिक्षा, आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष को भी प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और उनसे इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। हालांकि स्थिति को संभालते हुए पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया गया।
बंद का असर स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और निजी दफ्तरों पर भी आंशिक रूप से देखा गया, जबकि आम लोगों को दैनिक जरूरतों की वस्तुएं खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया अधिवक्ता बीके माला ने कहा कि UGC से जुड़े प्रस्ताव समाज और शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं हैं। इससे परंपरागत शैक्षणिक ढांचे और सामाजिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को बिना सहमति ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा।
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