धार जिले के राजगढ़ क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध मोहनखेड़ा जैन तीर्थ की पावन भूमि पर सोमवार को आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा और प्रवचन सुनने के लिए हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु बागेश्वर सरकार की एक झलक पाने को आतुर नजर आए। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शाम को कथा स्थल पर पहुंचे। इससे पहले उन्होंने मोहनखेड़ा जैन तीर्थ में भगवान आदिनाथ और दादा गुरुदेव राजेंद्र सुरीश्वर जी महाराज के दर्शन-वंदन किए। इस दौरान तीर्थ परिसर में विराजमान साधु-साध्वियों से भी भेंट की। श्री मोहनखेड़ा जैन तीर्थ ट्रस्ट मंडल की ओर से उनका भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया। जैसे ही पंडित धीरेंद्र शास्त्री मंदिर परिसर से बाहर निकले, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए बागेश्वर सरकार खुली जीप में सवार होकर सभी का अभिवादन स्वीकार करते हुए कथा स्थल तक पहुंचे। इस दौरान जमकर आतिशबाजी हुई और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बोले- जैन और हिंदू धर्म मिठास के समान
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जैन और हिंदू धर्म की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों धर्म सनातन संस्कृति की अविभाज्य परंपराएं हैं। “यदि कोई कट्टर सनातनी है, तो वह जैन ही है। जैन और हिंदू धर्म मिठास के समान हैं, जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता।” उन्होंने मोहनखेड़ा को भगवान आदिनाथ और दादा दयालु हनुमान जी की पावन धरा बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सनातन परंपरा का व्यापक जागरण हो चुका है, जो समाज को एक सूत्र में बांध रहा है। उन्होंने क्षेत्र में हो रही गौसेवा की भी सराहना करते हुए इसे निष्ठावान और प्रेरणादायी बताया। कन्या विवाह कार्यक्रम का आमंत्रण दिया
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने 15 फरवरी को बागेश्वर धाम में आयोजित होने वाले कन्या विवाह कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि सनातनी समाज की एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही स्पष्ट किया कि भारत में लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। समाज को जागरूक करने के लिए देशभर में कथाएं और भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल, अन्य जनप्रतिनिधि, समाज के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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