प्रसन्नजीत के रिहा होने पर उनकी बहन खुश हैं।
बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर घर लौट रहे हैं। 31 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए सात भारतीय कैदियों में प्रसन्नजीत भी शामिल हैं। उनकी बहन संघमित्रा पिछले कई सालों से उनकी वतन वापसी के लिए प्रयास कर रही थ
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प्रसन्नजीत को पाकिस्तान की जेल में सुनील अदे के नाम से बंद रखा गया था। साल 2021 में प्रसन्नजीत के पाकिस्तान की जेल में होने की जानकारी मिलने के बाद से उनकी बहन संघमित्रा लगातार उनकी रिहाई के लिए प्रयासरत थीं।
परिवार में खुशी का माहौल
प्रसन्नजीत की रिहाई की खबर 1 फरवरी को खैरलांजी पुलिस स्टेशन से फोन पर मिली, जिसके बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बाद में अमृतसर थाने से आए फोन पर बहन संघमित्रा ने सालों बाद अपने भाई की आवाज सुनी। हालांकि, प्रसन्नजीत के लापता होने के बाद उनके पिता का निधन हो गया था।
युवक के घर वापस आने की खबर पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
प्रसन्नजीत फिलहाल अमृतसर में
प्रसन्नजीत के जीजा राजेश उन्हें लेने के लिए अमृतसर जाएंगे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और दूर अकेले यात्रा करने में असमर्थता के कारण उन्हें मदद की आवश्यकता है। प्रशासन ने उन्हें सहायता का आश्वासन दिया है।
पाकिस्तान से रिहा हुए प्रसन्नजीत रंगारी अटारी-वाघा बॉर्डर पर कस्टम और इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद फिलहाल रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड और गुरु नानक देव अस्पताल अमृतसर में हैं।

बेटे की रिहाई खबर सुन मां की आंखों से आंसू छलक आए।
2017 में हुआ था लापता
प्रसन्नजीत रंगारी वर्ष 2017-18 में घर से लापता हो गए थे। वह बिहार चले गए थे और फिर वापस घर लौटे थे, लेकिन उसके बाद दोबारा लापता होने पर परिजनों ने उन्हें काफी तलाश किया था। कोई जानकारी न मिलने पर उन्हें मृत मान लिया गया था।
लेकिन दिसंबर 2021 में एक फोन आया और पता चला कि उनका भाई प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है। परिजनों को पता चला था कि 1 अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया। जहां वह, सुनिल अदे के नाम से बंद था।

प्रसन्नजीत को वापस लाने के लिए बहन संघमित्रा ने 7 साल तक प्रयास किया।
प्रसन्नजीत ने बी. फार्मेसी की पढ़ाई की
बालाघाट जिले के खैरलांजी में रहने वाला प्रसन्नजीत रंगारी पढ़ाई में तेज था। इसलिए कर्ज लेकर उनके बाबूजी लोपचंद रंगारी ने उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी।
पढ़ाई पूरी कर साल 2011 में एमपी स्टेट फॉर्मसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन किया था। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर आ गया।
मां बेटे के मानसिक रूप से बीमार बेटे की चिंता में है, प्रसन्नजीत के लौटने और उसके बीमार होने से मां और बहन की आंखो में खुशी और गम दोनो दिखाई देता है।
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प्रिय भाई, मैं रक्षाबंधन पर तुझे बहुत याद करती हूं। मैं राखी बांधना चाहती हूं, लेकिन तू मुझसे बहुत दूर है। मैं तुझसे मिलना भी चाहती हूं। तू पाकिस्तान की जेल में बंद है। भारत सरकार से मांग करती हूं कि ये राखी पहुंचाकर एक बहन का अरमान पूरा करे।

चिट्ठी में लिखी इस इबारत को पढ़ने के बाद संघमित्रा खुद को संभाल नहीं पाती और भाई की याद में रोने लगती है। वह पिछले 4 साल से अपने भाई को वापस भारत लाने की कोशिशें कर रही है। भारत सरकार को कई बार चिट्ठी लिख चुकी है लेकिन अभी तक उसे कोई कामयाबी नहीं मिली है। पढ़ें पूरी खबर…