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Rewa News: रीवा में भी UGC कानून को लेकर बुलाए गए बंद का असर देखने को मिला. सवर्ण समाज समेत कई अन्य संगठनों ने बंद का समर्थन किया. समाज ने मांग की है कि केंद्र सरकार यूजीसी से संबधित कानून को पूरी तरह रद्द करे.
रीवा. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए UGC कानून के विरोध में मध्य प्रदेश के रीवा में भी बंद का आह्वान किया गया था. सवर्ण समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और बाजार की दुकानों को बंद कराया. हालांकि UGC नियमों को लागू किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाई जा चुकी है, इसके बावजूद विरोध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को भारत बंद के आह्वान के तहत रीवा में संगठन से जुड़े लोग सुबह से ही सड़कों पर उतर आए और शांतिपूर्वक तरीके से बंद को सफल बनाया. प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसे देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. पूरे बंद के दौरान माहौल शांतिपूर्ण बना रहा.
सवर्ण समाज की मांग है कि केंद्र सरकार इस कानून को पूरी तरह रद्द करे और समाज के सभी वर्गों को एक समान दृष्टि से देखा जाए. उनका कहना है कि किसी भी कानून के जरिए जातियों को आपस में न लड़ाया जाए और किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए. यूजीसी को लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.
प्रस्तावित यूजीसी कानून के विरोध में रीवा शहर में खूब विरोध देखने को मिला. सवर्ण समाज के आह्वान पर युवा आर्मी भी बंद में शामिल हुई. प्रदर्शनकारियों ने इसे समाज को विभाजित करने वाला कानून बताते हुए राष्ट्रपति के नाम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा. युवा आर्मी और सवर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख बाजारों से रैली निकाली थी. इस दौरान सरकार और यूजीसी नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. एक फरवरी को बंद का आह्वान किया था. वहीं बीते शुक्रवार को सभी प्रदर्शनकारी कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे, जहां लगभग एक घंटे तक हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया था. इस दौरान माहौल पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण रहा. ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि यूजीसी से जुड़ा यह कानून वापस लिया जाए.
कानून सामाजिक एकता को तोड़ने वाला
लोकल 18 से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता वीके माला ने कहा कि यह कानून समाज में एकता को तोड़ने वाला है. जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. सवर्ण आगे भी हर स्तर पर विरोध करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि 1857 से आज तक सवर्णों ने देश को अपने खून से सींचा है, इसलिए किसी भी सरकार को जाति के आधार पर राष्ट्र को नहीं बांटने देंगे. हमने बिना जाति देखें साथ-साथ काम किया है, बिना जाति पूछे भोजनालय में भोजन किया है, तो ये UGC नियम लागू होने से दो भाइयों को आपस में बांटने का कोई नियम कानून नहीं पास होने देंगे.
यूनिवर्सिटी में पढ़ने से रोकने का प्रयास
उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के लागू होने से सवर्ण के बच्चे अब जेल से ज्यादा यूनिवर्सिटी जाने से डरेंगे. हर जगह सवर्ण के लिए खाई नहीं खोदने देंगे. हम आरक्षण के बिना आगे आते हैं, उसमें भी समस्या है, तो हमारे बच्चों को यूनिवर्सिटी में पढ़ने से रोकने का ये प्रयास है, जो सवर्ण समाज कभी नहीं होने देगा.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.