भोपाल. मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह का मंत्री पद अब असमंजस की स्थिति में फंस गया है, जहां सुप्रीम कोर्ट की फटकार और BJP के केन्द्रीय नेतृत्व का फैसला निर्णायक साबित होगा. कर्नल सोफिया कुरैशी पर “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद विवादित टिप्पणी करने के मामले में शाह पर सवाल उठे हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को SIT रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन स्वीकृति पर दो हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया, जिससे शाह के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. BJP प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भोपाल में कहा कि यह मुद्दा सरकार और संगठन के संज्ञान में है, और केन्द्रीय नेतृत्व ही अंतिम फैसला लेगा.
दरअसल, इस मामले ने BJP की इमेज को भी प्रभावित किया है, क्योंकि शाह जैसे वरिष्ठ नेता पर महिलाओं और सेना से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब BJP अध्यक्ष का जवाब इशारा करता है कि पार्टी आंतरिक रूप से इसे गंभीरता से ले रही है, और शाह का पद बचना या जाना केन्द्रीय नेतृत्व पर निर्भर करेगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अभियोजन स्वीकृति दी गई तो शाह को मंत्री पद से हटाना पड़ सकता है, जो MP सरकार की स्थिरता पर असर डालेगा.
यह विवाद पुराना है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से नया मोड़ ले चुका है. ऑपरेशन सिंदूर में कर्नल सोफिया कुरैशी की भूमिका को लेकर शाह ने टिप्पणी की थी, जो महिलाओं की सशक्तिकरण और सेना की गरिमा से जुड़ी थी. सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि SIT रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई करें, अन्यथा कोर्ट हस्तक्षेप करेगा. BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने न्यूज 18 इंडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि बातचीत चल रही है और केन्द्रीय नेतृत्व राज्य के साथ मिलकर सही फैसला लेगा. शाह के खिलाफ केस चलने पर अभियोजन स्वीकृति राज्य सरकार को देनी होगी, जो मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए चुनौतीपूर्ण है.
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह मामला BJP की महिला वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है, खासकर 2024 लोकसभा चुनावों के बाद. शाह, जो कैबिनेट मंत्री हैं, की छवि पर असर पड़ेगा. यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक बयानबाजी पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कितनी सख्त हो गई है, और पार्टियां अब ऐसे मामलों में सतर्क रहेंगी.
विवाद की पृष्ठभूमि और ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण अभ्यास था, जहां कर्नल सोफिया कुरैशी ने अहम भूमिका निभाई. मंत्री विजय शाह की अभद्र टिप्पणी को विपक्ष ने महिलाओं का अपमान बताया था. इस पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और जब SIT ने जांच की, लेकिन देरी से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई.
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
अभियोजन स्वीकृति के लिए 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को दो हफ्ते का समय दिया. फटकार लगाते हुए कहा कि देरी अस्वीकार्य है. शाह की सुनवाई जारी है, जो उनके पद पर सीधा असर डाल सकती है.
विजय शाह विवाद टाइमलाइन (कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला)
| तारीख | घटना / विकास | विवरण / स्रोत |
|---|---|---|
| मई 2025 (शुरुआत) | विवादित टिप्पणी | एमपी मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर में मीडिया ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित (कथित रूप से अपमानजनक/सांप्रदायिक) टिप्पणी की। विपक्ष ने निंदा की। |
| 14 मई 2025 | मध्य प्रदेश हाई कोर्ट आदेश | हाई कोर्ट ने पुलिस केस दर्ज करने का आदेश दिया। शाह की टिप्पणी को “अश्लील और अपमानजनक” बताया। |
| 19 मई 2025 | सुप्रीम कोर्ट फटकार और SIT गठन | सुप्रीम कोर्ट ने शाह की माफी अस्वीकार की, इसे “राष्ट्रीय शर्म” बताया। SIT जांच के लिए गठित की गई। |
| अगस्त 2025 | SIT ने अभियोजन स्वीकृति मांगी | SIT ने अंतिम रिपोर्ट जमा की और राज्य सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी। |
| 28 मई 2025 | सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर स्टे जारी रखा | शाह की गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत जारी। |
| 19 जनवरी 2026 | सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार | सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को फटकार लगाई। SIT रिपोर्ट पर देरी पर नाराजगी। राज्य सरकार को 2 हफ्ते (फरवरी 2026 तक) में अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने का निर्देश। |
| जनवरी 2026 (रिपब्लिक डे के बाद) | विवाद जारी, कांग्रेस हमला | शाह ने रिपब्लिक डे पर झंडा फहराया, कांग्रेस ने निंदा की। BJP ने कहा केन्द्रीय नेतृत्व फैसला लेगा। |
| फरवरी 2026 (अपडेट) | मामला लंबित | 2 हफ्ते की समय सीमा समाप्त होने के करीब। BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा केन्द्रीय नेतृत्व फैसला लेगा। मंत्री पद पर अनिश्चितता बनी हुई। (*स्रोत: विभिन्न न्यूज अपडेट्स) |
नोट:
• टाइमलाइन गूगल सर्च और प्रमुख समाचार स्रोतों ।
• मुख्य फोकस सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर है।
• वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026): 2 हफ्ते की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हुआ।