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पाकिस्तान की सिंध असेंबली के पूर्व सदस्य रहे दीवान सचल ने कहा है कि एक मैच का बॉयकॉट करना बेहद ही खराब और बेतुका फैसला है.
पाकिस्तान ने भारत के साथ ग्रुप स्टेज मैच का बॉयकॉट कर अपनी ही आवाम से पंगा ले लिया है. पाकिस्तान के लोगों का कहना है कि पीसीबी इसका कारण चाहे जो बताए, मगर सच ये है कि पाक टीम डरी हुई है. पाकिस्तान के एक नेता ने तो इसे बेहद ही बेतुका फैसला बताया है. उनका कहना है कि ये क्या बात हुई? एक मैच नहीं खेलेंगे तो अगर नॉकआउट में भारत के साथ मुकाबला हुआ तो क्या करेंगे?
पाकिस्तान की सिंध असेंबली के पूर्व सदस्य रहे दीवान सचल ने कहा है कि एक मैच का बॉयकॉट करना बेहद ही खराब और बेतुका फैसला है. अगर पाकिस्तान 1980 में मॉस्को ओलंपिक को बॉयकॉट कर सकता है, जब वह हॉकी में शीर्ष पर था, तो अब वर्ल्डकप का भी पूर्ण बॉयकॉट करना चाहिए. सरकार को अगर पेनाल्टी का डर है तो आईसीसी का ये नियम है कि सरकार मना करे तो किसी क्रिकेट बोर्ड पर पेनल्टी नहीं लग सकती.
पाकिस्तान के ही पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने इस फैसले को बिल्कुल गलत बताया है. उन्होंने कहा है कि इस तरह का फैसला ये साबित करता है कि टीम भारत का सामना करने से डरती है, इसीलिए नहीं खेलना चाहती है. उन्होंने ये भी सलाह दी कि पाकिस्तान को अपनी क्रिकेट पर फोकस करना चाहिए, न कि इस तरह के फैसलों पर.
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पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद हफीज ने भी बायकॉट पर चिंता जताई है, उन्होंने कहा है कि इस तरह का फैसले क्रिकेट के लिहाज से चिंताजनक हैं, हालांकि उन्होंने इसकी शुरुआत नो हैंड शेक विवाद को माना जो एशिया कम में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था.
पाक के पूर्व क्रिकेटर राशिद लतीफ ने इस बॉयकॉट के बारे में कहा कि इस कदम से पाक क्रिकेट को नुकसान हो सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ये फैसला आईसीसी पर दबाव बनाने वाला भी कहा जा सकता है.
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