हार चुकी बहन के पास आया था फोन… आपका भाई पाकिस्तान में! जानें कौन था वो जो प्रसन्नजीत के लिए बना भगवान

हार चुकी बहन के पास आया था फोन… आपका भाई पाकिस्तान में! जानें कौन था वो जो प्रसन्नजीत के लिए बना भगवान


Balaghat News: 7 साल बाद प्रसन्नजीत घर आने वाला है. पाकिस्तान की जेल से उसकी रिहाई हो चुकी है. वह अमृतसर में है. उसको घर लाने के लिए बालाघाट कलेक्टर और एसपी ने खास व्यवस्था की है. प्रसन्नजीत के जीजा उसको लेने के लिए अमृतसर निकल चुके हैं. मगर, अब भी वही सवाल सबके जहन में है कि आखिर प्रसन्नजीत पाकिस्तान पहुंचा कैसे? अब इसका जवान खुद प्रसन्नजीत ही देंगे, जिसका सबको इंतजार है. हालांकि, बहन संघमित्रा ने दिलचस्प बात का खुलासा जरूर किया.

प्रसन्नजीत साल 2017 में लापता हुए थे. अक्टूबर 2019 में वह पाकिस्तान पहुंच गए थे. इस दौरान उनकी बहन संघमित्रा ने उन्हें काफी ढूंढा लेकिन वह नहीं मिले. ऐसे में निराश हो चुकी बहन ने भाई को मृत मान लिया था. तभी साल 2021 में एक फोन आया और बहन संघमित्रा की जिंदगी बदल गई. वह फोन था कुलदीप सिहं कछवाहा का था, जो पाकिस्तान में लाहौर की कोट लखपत जेल से 29 साल बाद रिहा हुए थे. उन्होंने बताया कि आपका भाई पाकिस्तान की जेल में बंद है.
तब बढ़ गया था संघमित्रा का संघर्ष
इस खबर के बाद बहन संघमित्रा की जिंदगी और उलझ गई. भाई को छुड़ाने के लिए संघमित्रा ने न जाने कितने अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटे, कितने नेताओं की दहलीज पर मदद की गुहार लगाई. संघमित्रा के पिता बीमार चल रहे थे. मां भी बेटे की याद में मानसिक संतुलन खो चुकी थी. जब संघमित्रा और उनके परिवार को प्रसन्नजीत के जिंदा होने की खबर मिली तो बीमार पिता में जीने की आस बढ़ गई. संघमित्रा डीएम, एसपी या भोपाल तक ही नहीं गई, मानव अधिकार आयोग में भी याचिका डाली. इसके बाद कार्रवाई तेज हुई. पूर्व जिला पंचायत सदस्य विक्रम देशमुख ने भी काफी मदद की.

पिता की हो गई मौत
अप्रैल 2024 में जब प्रसन्नजीत के पाकिस्तान में होने की जांच की जा रही थी, तभी संघमित्रा के पिता जिंदगी से जंग हार गए. बेटे की राह देखते-देखते उनकी मौत हो गई. दूसरी तरफ मां मानने को तैयार नहीं थी कि बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद है और पति लोपचंद रंगारी की मौत हो चुकी है. उनको मति भ्रम था कि उनका बेटा और पति घर में है.

उम्मीद… अब सब ठीका होगा
मां घर पर अकेली रह गई. संघमित्रा उनको अपने ससुराल ले जाना चाहती थी, लेकिन वो आने को तैयार नहीं थीं. मां अब भी अंजान हैं कि उनका बेटा पाकिस्तान की जेल से रिहा हो चुका है. हालांकि, बहन की आंखों में आंसू हैं. खुशी इस बात की कि भाई आ रहा है और दुख इस बात का ये देखने के लिए पिता नहीं रहे. संघमित्रा को यकीन है कि भाई के आने से उनके सारे दुख खत्म हो जाएंगे. मानसिक संतुलन खो चुकी मां भी ठीक हो जाएगी.

घर कैस आएगा प्रसन्नजीत?
प्रसन्नजीत 7 साल बाद वतन वापसी कर रहे हैं. 1 फरवरी को इस बात की जानकारी परिवार को हो गई थी. पंजाब पुलिस ने परिजनों पर प्रसन्नजीत को ले जाने के लिए कहा है. लेकिन संघमित्रा के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण प्रसन्नजीत को लाने के लिए अमृतसर जाना मुश्किल था. सवाल था कि प्रसन्नजीत अमृतसर से कैसे आएगा?
कलेक्टर ने भेजा कर्मचारी, एसपी ने जवान
संघमित्रा की इस समस्या को लोकल 18 ने कलेक्टर मृणाल मीना को बताया. कलेक्टर ने न सिर्फ आने-जाने की व्यवस्था की, बल्कि रोजगार सहायक को भी उनकी मदद के लिए भेजा. वहीं, बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने भी परिजनों से बातचीत की और कागजी कार्रवाई को आसान बनाने के लिए प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोबरागढ़े के साथ एक जवान को भेजा है.



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