कुंभकरण को जगाने का दृश्य देखने उमड़ी भारी भीड़: विदिशा की चलित रामलीला में हुआ भीषण युद्ध, मंत्री प्रहलाद पटेल बोले यह 125 सालों का गौरव – Vidisha News

कुंभकरण को जगाने का दृश्य देखने उमड़ी भारी भीड़:  विदिशा की चलित रामलीला में हुआ भीषण युद्ध, मंत्री प्रहलाद पटेल बोले यह 125 सालों का गौरव – Vidisha News




विदिशा की प्राचीन श्रीरामलीला में धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। सोमवार को रामलीला मैदान में कुंभकरण वध की लीला का भव्य और जीवंत मंचन किया गया, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु पहुंचे। विदिशा की रामलीला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका मंचन किसी एक मंच पर नहीं, बल्कि पूरे मैदान में घूम-घूमकर किया जाता है। इसी वजह से इसे “चलित रामलीला” कहा जाता है। इस अनूठी परंपरा के कारण विदिशा के साथ-साथ आसपास के जिलों और ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचते हैं। कुंभकरण को जगाने का दृश्य रहा आकर्षण का केंद्र कुंभकरण वध की लीला में लंकापति रावण अपने परिजनों के मारे जाने से दुखी होकर कुंभकरण को जगाने पहुंचा। उसे नींद से जगाने के लिए ढोल-नगाड़े बजाए गए और आतिशबाजी की गई। लंबे प्रयासों के बाद कुंभकरण अपनी छह महीने की नींद से जागा, जिसे ब्रह्माजी से एक दिन जागने का वरदान प्राप्त था। कुंभकरण ने रावण को दी सही राह की सीख जागने पर रावण ने कुंभकरण को सीता हरण और वानर सेना के लंका में प्रवेश की पूरी कहानी सुनाई। यह सुनकर कुंभकरण ने रावण को फटकार लगाई और कहा कि माता सीता का हरण कर उसने बड़ा पाप किया है। कुंभकरण ने रावण को श्रीराम से बैर न लेने की सलाह दी और बताया कि श्रीराम साक्षात भगवान विष्णु के अवतार हैं। रणभूमि में हुआ भीषण युद्ध रावण ने कुंभकरण की बात नहीं मानी और उसे मदिरा व भोजन कराकर युद्ध के लिए रणभूमि में भेज दिया। रणक्षेत्र में कुंभकरण का हनुमानजी, सुग्रीव, नल और नील के साथ भयंकर युद्ध हुआ। जब वानर सेना भयभीत हो गई, तब स्वयं श्रीराम रणभूमि में आए और अपने तीक्ष्ण बाणों से कुंभकरण का वध किया। इस दौरान अतिकाय जैसे राक्षस का भी संहार हुआ। लीला के समापन पर पूरा मेला परिसर “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद रामलीला मैदान में कुंभकरण के पुतले का दहन किया गया और भव्य आतिशबाजी भी हुई, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मंत्री प्रहलाद पटेल ने की चलित रामलीला की सराहना कुंभकरण वध की लीला को देखने प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी रामलीला मैदान पहुंचे। उन्होंने विदिशा की इस रामलीला को “चलित रामलीला” बताते हुए कहा कि इसकी पहचान न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में है। 125 वर्षों की परंपरा, विदिशा के लिए गौरव मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि यह रामलीला 125 वर्षों की गौरवशाली परंपरा में प्रवेश कर चुकी है, जो विदिशा के लिए गर्व की बात है। जिस भूमि पर 125 वर्षों से रामकथा का मंचन हो रहा है, वह भूमि स्वतः ही पावन हो गई है। उन्होंने रामलीला को शुरू करने से लेकर आज तक सहयोग करने वाले सभी लोगों की सराहना की।



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