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Banana Farming Tips: केले की फसल को ठंड, बारिश और फंगल इंफेक्शन से बचाने के लिए कृषि अधिकारी ने दो देसी जुगाड़ बताए. इससे पोषक तत्वों की कमी भी नहीं होती और फसल सुरक्षित रहती है. इसके लिए कोई महंगी दवा की जरूरत नहीं. बस बोरे-कचरे से काम हो जाएगा…
Banana Farming Tips: बुरहानपुर में केले की खेती करने वाले किसानों के लिए ठंड और बारिश का मौसम सबसे खतरनाक साबित होता है. कड़ाके की ठंड, पाला और लगातार बारिश से फसल में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. पौधे पीले पड़ने लगते हैं, पत्तियां झड़ जाती हैं. ऐसे में पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. लेकिन, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि महंगी दवा की जरूरत नहीं, सिर्फ दो देसी उपाय अपनाकर फसल को बचाया जा सकता है.
टाट का बोरा, सूखा कचरा
कृषि अधिकारी विशाल पाटीदार ने लोकल 18 को बताया कि ठंड में केले की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. फंगस इंफेक्शन, पौधों का पीला पड़ना और पाला जमने से फसल खराब होने लगती है. बचाव के लिए दो आसान और सस्ते तरीके बताए हैं. पहला- शाम के समय खेत में टाट के बोरे, सूखा कचरा या सूखी लकड़ियां जलाकर धुआं करें. इससे खेत के आसपास गर्माहट बनी रहती है, ठंडी हवा का असर कम होता है, कीट-पतंगे मर जाते हैं और फंगल इंफेक्शन फैलने का खतरा घट जाता है.
जानें दूसरा तरीका
दूसरा- ठंड के दिनों में शाम को सिंचाई बहुत कम या बिल्कुल न करें. ज्यादा पानी से फंगस बढ़ती है. जरूरत पड़ने पर सुबह हल्की सिंचाई करें. अधिक ठंड पड़ने से पौधों में पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है. कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे जरूरी तत्व ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते. इससे पौधे की ग्रोथ रुक जाती है, पत्तियां पीली पड़ती हैं और फल अच्छे नहीं बनते. धुआं और कम सिंचाई इन समस्याओं को भी कंट्रोल कर देती है.
यह देसी जुगाड़ बिल्कुल सस्ता है. सिर्फ टाट के बोरे और थोड़े से सूखे कचरे से काम चल जाता है. कोई महंगा केमिकल या स्प्रे नहीं लगाना पड़ता. किसान बताते हैं कि इन दो उपायों को अपनाने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है, नुकसान नहीं होता और अच्छी पैदावार मिलती है. बुरहानपुर के कई किसान अब इन तरीकों को अपना रहे हैं और फसल बचा रहे हैं. कृषि विशेषज्ञ विशाल पाटीदार का कहना है कि अगर किसान इन दोनों बातों का ध्यान रखें तो ठंड और बारिश में भी केले की फसल सुरक्षित रहेगी.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें