दतिया में आईटीआई कॉलेज के पास सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। वीडियो में एक युवक खुले तौर पर यह स्वीकार करता सुनाई दे रहा है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थर फेंके गए। युवक वीडियो में कहता है कि हमने पत्थर मारे, अगर पहले आ जाते तो किसी का मकान नहीं टूटने देते। इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन पर हमले की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, पूरे मामले में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने प्रशासन पर हमले की खबरों का सिरे से खंडन किया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक थी, क्योंकि जिस जमीन पर अतिक्रमण किया गया था वह सरकारी भूमि है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अवैध कब्जे की मिली थी शिकायतें
रविवार देर शाम एसडीएम संतोष तिवारी, तहसीलदार बृजमोहन आर्य और नगर पालिका का मदाखलत अमला बक्शी के हनुमान मंदिर के पास अतिक्रमण हटाने पहुंचा था। यह कार्रवाई आईटीआई कॉलेज प्रशासन की शिकायत पर की गई थी। शिकायत में बताया गया था कि कुछ लोगों द्वारा आईटीआई कॉलेज की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है। कलेक्टर बोले- किसी को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा
कार्रवाई के दौरान हंगामे की स्थिति बनी थी और प्रशासनिक अमले पर हमले की सूचना भी सामने आई थी, लेकिन उस समय इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। अब सामने आए वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में युवक यह भी कहता सुनाई दे रहा है कि जमीन सरकारी है तो क्या हुआ, खरीदी तो पैसों से है। मामले में कलेक्टर का कहना है कि, सरकारी जमीन पर किसी भी व्यक्ति को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।
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