खंडवा जिला अस्पताल में नियम विरुद्ध नियुक्ति और इलेक्ट्रीक सामग्री खरीदी में अनियमितता को लेकर विवाद सामने आया है। टेंडर फर्म की शिकायत के बाद अस्पताल में पदस्थ स्टीवर्ड को पद से हटा दिया गया है। मामला टेंडर प्रक्रिया के बावजूद बाजार से सामग्री खरीदी और लाइनमैन को अधिकारी स्तर का प्रभार दिए जाने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में कूलर, पंखा, फ्रिज और एसी जैसी इलेक्ट्रीक सामग्री की खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया के तहत प्रिंस इंटरप्राइजेज को अधिकृत किया गया था। टेंडर के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने इलेक्ट्रीक सामग्री की खरीदी टेंडर फर्म के बजाय बाजार से की। फर्म का आरोप है कि इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। शिकायत के बाद आरटीआई का लिया सहारा
प्रिंस इंटरप्राइजेज ने खरीदी प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर सूचना के अधिकार के तहत सामग्री खरीदी और रिपेयरिंग से संबंधित जानकारी मांगी। इसी बीच अस्पताल प्रशासन ने जिला अस्पताल में पदस्थ स्टीवर्ड अश्वनी लुक को पद से हटा दिया। लाइनमैन को दिया गया था स्टीवर्ड का प्रभार
फर्म का आरोप है कि अश्वनी लुक का मूल पद लाइनमैन का है, इसके बावजूद उन्हें अधिकारी स्तर के स्टीवर्ड पद का चार्ज दे दिया गया था, जो नियम विरुद्ध है। फर्म का कहना है कि टेंडर होने के बाद भी अन्य फर्म से खरीदी किया जाना वित्तीय अनियमितता का मामला है। 29 जनवरी को जारी आदेश में सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल ने अश्वनी लुक से स्टीवर्ड का प्रभार हटाते हुए मैनेजर यशवंत सोलंकी को जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। लोकायुक्त जाने की तैयारी में फर्म
प्रिंस इंटरप्राइजेज का कहना है कि वे इस पूरे मामले को लोकायुक्त के पास ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। फर्म के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी कर अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर पर खरीदी की, जो नियमों के विरुद्ध है। मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल ने कहा कि स्टीवर्ड अश्वनी लुक को लगातार बीमार रहने के कारण हटाया गया है। उन्होंने कहा अश्वनी लुक शुगर पेशेंट हैं और लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे थे। इसी वजह से उनका प्रभार हटाकर यशवंत सोलंकी को सौंपा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।
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