जबलपुर में स्पेशल आर्म्ड फोर्स (एसएएफ) की 6वीं बटालियन में 2 करोड़ रुपए से अधिक का ट्रैवलिंग अलाउंस (टीए) घोटाला सामने आया था, जो अब बढ़कर 3 करोड़ हो गया है। इस मामले में रांझी थाना पुलिस ने यहां तैनात एक एसएआई, मृत आरक्षक और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घोटाले का मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा लंबे समय से गायब है, जबकि मामला सामने आने के बाद आरक्षक अभिषेक झारिया ने 12 नवंबर को शोभापुर रेलवे फाटक के सामने ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या कर ली थी। टीए घोटाले की जांच एसएएफ के साथ-साथ जिला प्रशासन की टीम भी कर रही थी। पुलिस ने मामले में धारा 318-4, 338, 336-3, 340-2, 316-5 और 61-2 बीएनएस के तहत केस दर्ज किया है। 2018-19 से चल रहा घोटाला 200 गुना ज्यादा रकम, 12 आरक्षकों को TA से 10–10 लाख SAF में आरक्षकों का शुरुआती वेतन 23–25 हजार रुपए महीना होता है। कोष एवं लेखा आयुक्त के निर्देश पर जब स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल ने जांच की तो पता चला कि कुछ के बैंक खातों में उनकी सैलरी से 200 गुना ज्यादा रकम पड़ी है। 12 आरक्षकों के खातों में सिर्फ TA बिल से 10 लाख रुपए से जमा मिले। स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की जांच में पता चला है कि 6वीं बटालियन एसएएफ रांझी, जबलपुर में यात्रा भत्ता देयक, चिकित्सा भत्ता देयक और एफवीसी देयकों से कर्मचारियों को अत्यधिक राशि का भुगतान किया गया है। निलंबन के बाद हादसा– अभिषेक ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दी टीए कांड खुलते ही सत्यम और अभिषेक दोनों निलंबित कर दिए गए। शर्म और दबाव में अभिषेक ने 12 नवंबर को ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। उधर, सत्यम जांच शुरू होते ही गायब हो गया और फिर छिंदवाड़ा में उसकी शादी का कार्ड सामने आया। इसमें वेन्यू छिंदवाड़ा और डेट 22 नवंबर लिखी थी। शादी की जानकारी उसने विभाग को नहीं दी। एक बैंक खाते में कई बार हुआ भुगतान सेल की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अभिषेक झारिया को लगभग 55 लाख रुपए का भुगतान 582 यात्रा भत्ता देयकों के माध्यम में किया गया। यह भुगतान 2018-19 से अब तक की अवधि में हुआ है। जबकि अब तक अभिषेक को वेतन और एरियर से 26 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। यानी टीए भत्ते से मिले रुपए वेतन की तुलना में लगभग 210 प्रतिशत अधिक हैं। इसी प्रकार नीतेश कुमार पटेल को वेतन भत्तों में इसी अवधि में 102 वेतन एवं वेतन एरियर देयकों में 24.67 लाख दिए गए। जबकि यात्रा भत्तों में 335 देयकों से 30.51 लाख का भुगतान हुआ है। इस प्रकार उसे भी वेतन से अधिक भुगतान यात्रा भत्तों में किया गया है। दो मोर्चों पर जांच हुई– SAF कमांडेंट ने 3 सदस्यीय टीम, कलेक्टर ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई SAF कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी की जांच कमेटी ने 20 से ज्यादा आरोपियों के बयान दर्ज किए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत CEO अभिषेक गहलोत के नेतृत्व में 6 सदस्यीय विशेष टीम गठित की। इसके बाद 20 से अधिक आरक्षकों के खाते फ्रीज कर दिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि SAF का बाबू सत्यम शर्मा 50% से अधिक का लालच देकर अभिषेक के खाते में रुपए ट्रांसफर करवाता था। यह भी पता चला है कि जांच के घेरे से बचने के लिए सत्यम खाते में राशि न लेकर कैश लेता था। जांच के समय सत्यम के खाते में करीब 2 लाख 60 हजार रुपए मिले।
Source link