कैंसर का मतलब सबकुछ खत्म होना नहीं… 74 साल की उम्र में सबसे घातक बीमारी को हराया, जानें डॉ. ओंकार की कहानी

कैंसर का मतलब सबकुछ खत्म होना नहीं… 74 साल की उम्र में सबसे घातक बीमारी को हराया, जानें डॉ. ओंकार की कहानी


Khandwa News: खंडवा के MIG क्षेत्र में रहने वाले 74 वर्षीय डॉ. ओंकार सिंह चौहान आज सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि उन हजारों कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की मिसाल बन चुके हैं, जो इस बीमारी का नाम सुनते ही मानसिक रूप से हार मान लेते हैं. उम्र का वह पड़ाव, जब लोग इलाज के नाम से भी डर जाते हैं, उसी उम्र में डॉ. ओंकार ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात देकर साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो, तो बीमारी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हराई जा सकती है.

डॉ. ओंकार की जिंदगी अचानक तब बदल गई, जब करीब तीन साल पहले उनके कान में एक छोटी-सी गांठ उभरी. शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य संक्रमण या मामूली फोड़ा समझा, लेकिन डॉक्टर होने के नाते उनका अनुभव कुछ और ही कह रहा था. उन्होंने बिना देर किए जांच करवाई. शुरुआती रिपोर्ट में गांठ सामान्य बताई गई, लेकिन मन संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने बायोप्सी करवाई, जहां रिपोर्ट ने सब कुछ बदल दिया. कान में कैंसर की पुष्टि हो गई.

डर कर बैठे नहीं, भोपाल एम्स गए
कैंसर शब्द सुनते ही अक्सर मरीज और उनके परिवार टूट जाते हैं, लेकिन डॉ. ओंकार ने उसी पल तय कर लिया था कि डरकर बैठना नहीं है. उन्होंने कहा, “अगर बीमारी का पता चल गया तो अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं है.” इसके बाद उन्होंने भोपाल एम्स में विशेषज्ञों से संपर्क किया और इलाज शुरू किया. भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि कैंसर शुरुआती स्टेज में है और समय पर इलाज शुरू होने से इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना काफी ज्यादा है. डॉ. ओंकार को कुल तीन कीमोथैरेपी दी गईं. इस दौरान कमजोरी, थकान और कई साइड इफेक्ट्स भी आए, लेकिन उन्होंने कभी इलाज में लापरवाही नहीं की.

मन हारा तो शरीर हारा
Local 18 से बातचीत में डॉ. ओंकार सिंह चौहान कहते हैं कि इस पूरी जंग में उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया. उनका संयुक्त परिवार है, जिसमें बेटियां, भाई और भतीजे, सभी ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया. इलाज के दौरान परिवार के हर सदस्य ने उनका मनोबल बढ़ाया और हर कदम पर साथ दिया. डॉ. ओंकार बताते हैं, “कैंसर सिर्फ शरीर से नहीं लड़ता, यह सबसे पहले इंसान के मन पर हमला करता है. अगर मन हार गया, तो शरीर भी हार जाता है. मैंने तय किया कि मैं मानसिक रूप से मजबूत रहूंगा और डॉक्टरों की हर सलाह को ईमानदारी से मानूंगा.”

अब जी रहे सामान्य जीवन
तीन साल पहले कैंसर से जूझ रहे डॉ. ओंकार आज पूरी तरह स्वस्थ हैं. वे न सिर्फ चल-फिर रहे हैं, बल्कि आज भी मरीज देख रहे हैं और अपना सामान्य जीवन जी रहे हैं. उनका कहना है कि कैंसर को लेकर समाज में बहुत डर फैला है, जबकि हकीकत ये है कि अगर समय रहते जांच हो जाए और सही इलाज मिले तो कैंसर को हराया जा सकता है.

मैंने हराया तो आप भी कर लेंगे…
कैंसर दिवस के मौके पर डॉ. ओंकार सिंह चौहान ने कैंसर मरीजों को खास संदेश दिया. उन्होंने कहा, “जो भी कैंसर से जूझ रहा है, वह यह न सोचे कि सब खत्म हो गया. मैंने 74 साल की उम्र में कैंसर को हराया है. अगर मैंने कर लिया, तो आप भी जरूर कर सकते हैं. बस समय पर इलाज कराइए, लापरवाही मत कीजिए और सबसे जरूरी हिम्मत मत हारिए.”



Source link