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Masoor Fasal Care Tips: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में मसूर की फसल में दीमक और कीटों का प्रकोप बढ़ गया है. किसानों को पौधों के सूखने और उत्पादन नुकसान का खतरा है. क्लोरपायरीफॉस और फिप्रोनिल का समय पर छिड़काव, नमी बनाए रखना और नीम खली का प्रयोग फसल बचाने में मदद करता है. उकठा रोग और फली वेधक कीट से बचाव के लिए बीज उपचार और फफूंदनाशक का उपयोग जरूरी है. यदि इन उपायों को नजरअंदाज किया गया तो 60% तक फसल का नुकसान संभव है.
Agri Tips: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में मसूर की फसल इस समय फलियों में दाना भरने की अवस्था में है. लेकिन किसानों के लिए अब चिंता का कारण बन गया है दीमक का तेज प्रकोप. कई क्षेत्रों में पौधे अचानक सूखने लगे हैं. वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह के अनुसार, दीमक मुख्य रूप से सूखी मिट्टी वाले खेतों और असिंचित फसलों में सक्रिय रहती है. यह पौधों की जड़ों को अंदर से खोखला कर देती है, जिससे पौधों को पोषण नहीं मिलता और वे ऊपर से मुरझा जाते हैं.
समय पर नियंत्रण जरूरी
संजय सिंह ने बताया कि यदि फसल में दीमक दिखाई दे तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. इसके लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी को 1.5-2 लीटर मात्रा में 50-60 किलोग्राम सूखी रेत या मिट्टी के साथ मिलाकर प्रति हेक्टेयर बुरकाव करना चाहिए और हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इसके अलावा फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत का 10-12 किलो प्रति हेक्टेयर प्रयोग भी प्रभावी माना गया है.
नमी और जैविक उपाय
दीमक सूखे खेतों में ज्यादा सक्रिय रहती है. इसलिए हल्की सिंचाई करके खेत में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है. जैविक उपायों के तहत खेत में बने दीमक के टीले या बॉम्ब को नष्ट करें. बुवाई से पहले नीम की खली का इस्तेमाल भी दीमक के प्रकोप को रोकने में मदद करता है.
अन्य रोग और कीटों का खतरा
मसूर की फसल पर उकठा रोग और फली वेधक कीट का भी खतरा रहता है. उकठा रोग से बचाव के लिए नमी बनाए रखना और रोग के लक्षण दिखते ही हाई-स्पेक्ट्रम फफूंदनाशक का छिड़काव करना चाहिए. फली वेधक कीट से बचने के लिए फूल से फल बनने की अवस्था में डेल्टा मेथ्रीन 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
बीज उपचार से बढ़े उत्पादन
संजय सिंह के अनुसार, बीज उपचार सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है. बुवाई से पहले प्रति किलो बीज 2 ग्राम थायरम और 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें. इसके बाद राइजोबियम और पीएसबी कल्चर से बीज उपचार करने से फसल की बढ़वार और उत्पादन बेहतर होता है. यदि समय रहते इन कीटों और रोगों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो मसूर की फसल में 60 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है और कई बार पूरी फसल सूख भी सकती है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें