मोहन ढाकले/बुरहानपुर: बुरहानपुर के खानका वार्ड में रहने वाले इत्तेखार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. कक्षा आठवीं तक पढ़े-लिखे इत्तेखार के पास नौकरी नहीं थी. उनके पास बस ₹600 ही जमा थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उसी छोटे से पैसे से उन्होंने अपने घर में पापड़ बनाने का बिजनेस शुरू किया.
इत्तेखार बताते हैं कि शुरुआत में बहुत मुश्किलें आईं. किसान से सामग्री लेने में दिक्कत होती थी, ग्राहकों तक पहुंचना मुश्किल था. लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी.
खुद ही पापड़ बनाया घर घर जाकर बेचा
इत्तेखार ने शुरू में खुद ही पापड़ बनाया और घर-घर जाकर बेचने लगे. कभी-कभी तो सिर्फ दो-चार किलो ही बिक पाते थे. लेकिन धीरे-धीरे लोगों को उनके पापड़ का स्वाद और क्वालिटी पसंद आने लगी. उन्होंने अपने पापड़ में घर के मसाले डाले, जिससे उसका स्वाद अलग और ताज़ा रहता था.
आज इत्तेखार का बिजनेस इतना बड़ा हो चुका है कि उन्होंने बड़ा कारखाना ले लिया है. वहां तीन लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. उनका कहना है, “मैं हर महीने लाखों रुपए कमाता हूं और जो पापड़ बनाते हैं, वह दिल्ली और मुंबई तक ऑर्डर के लिए भेजे जाते हैं.”
पापड़ों की क्वालिटी और रेंज
इत्तेखार 10 तरह के पापड़ बनाते हैं. उड़द, चावल, नागली, आम, जीरा, मसाला और हरी मिर्च के पापड़ उनकी सबसे खास प्रोडक्ट लाइन हैं. हर पापड़ करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता. यही वजह है कि ग्राहक ऑर्डर देकर घर भी बनवाते हैं. उनके पापड़ों की कीमत ₹200 किलो से ₹400 किलो तक है.
600 से शुरू हुआ सफर पहुंचा लाखों तक
इत्तेखार की कहानी ये सिखाती है कि अगर मेहनत और लगन हो तो कम पैसों से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है. ₹600 से शुरू हुए इस छोटे से बिजनेस ने आज लाखों की कमाई और रोजगार देने का मौका दे रखा है. उनके जैसे लोग दिखाते हैं कि संघर्ष और जूनून से हर मुश्किल आसान हो सकती है.