खंडवा. आमतौर पर तीन साल की उम्र में बच्चे को स्कूल जाने के लिए तैयार किया जाता है. इस उम्र में माता-पिता अपने बच्चों को नर्सरी या प्ले स्कूल में दाखिला दिलाते हैं, जहां बच्चा बैठना, खेलना, हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला और गिनती सीखना शुरू करता है लेकिन अगर इतनी छोटी उम्र में कोई बच्चा पूरे शुद्ध उच्चारण के साथ गायत्री मंत्र, भजन या हनुमान चालीसा की चौपाइयां सुना दे, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी को चौंका दिया है. यह वीडियो खंडवा के तीन साल के बच्चे नित्यांश पाटिल का है, जो स्कूल के मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ गायत्री मंत्र का पाठ करता नजर आ रहा है. नन्हे नित्यांश का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर कोई इस बच्चे की प्रतिभा की तारीफ कर रहा है.
नित्यांश की प्रस्तुति सबसे अलग
स्कूल के प्रिंसिपल नितिन ढाका लोकल 18 को बताते हैं कि कार्यक्रम के बाद जब उन्होंने नित्यांश का वीडियो देखा, तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ कि मात्र तीन साल की उम्र में कोई बच्चा इतना शुद्ध और आत्मविश्वास से गायत्री मंत्र का पाठ कर सकता है. उन्होंने बताया कि नित्यांश उनके स्कूल में प्ले ग्रुप का छात्र है. बसंत पंचमी के कार्यक्रम में सरस्वती पूजा के साथ अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां भी हुई थीं लेकिन नित्यांश की प्रस्तुति सबसे अलग और खास रही.
संस्कृति को समझ सकें बच्चे
प्रिंसिपल नितिन ढाका ने आगे कहा कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ हमारी संस्कृति और आस्था से जोड़ने की कोशिश की जाती है. नित्यांश का यह उदाहरण बताता है कि अगर बच्चों को सही माहौल और संस्कार मिलें, तो वे बहुत छोटी उम्र में भी बड़ी बातें सीख सकते हैं. उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को मोबाइल और टीवी तक सीमित न रखें बल्कि उन्हें पूजा-पाठ, आरती और मंदिर दर्शन से जोड़ें ताकि वे अपनी संस्कृति को समझ सकें.
नित्यांश के माता-पिता सावन पाटिल और श्वेता पाटिल लोकल 18 को बताते हैं कि उनका बेटा अभी से ही भजन और आरती सुनना पसंद करता है. वह सोते समय भी भजन सुनकर ही सोता है. नित्यांश को गणेश जी की आरती, भगवान शिव की आरती, हनुमान चालीसा की चौपाइयां और कई कठिन भजन कंठस्थ याद हैं. परिवार वालों के अनुसार, नित्यांश टीवी पर मुरारी बापू, प्रदीप मिश्रा, चिन्मयानंद बापू और बागेश्वर सरकार की कथाएं बड़े ध्यान से सुनता है. कई बार वह खुद कहता है कि उसे दादाजी धूनी वाले मंदिर और महालक्ष्मी मंदिर जाना है. रिश्तेदार भी उसे देखकर कहते हैं कि यह बच्चा किसी संत से कम नहीं है क्योंकि इतनी छोटी उम्र में उसका भगवान से गहरा जुड़ाव है. सावन पाटिल पेशे से पत्रकार हैं. उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनका बेटा पढ़ाई के साथ-साथ वैदिक शिक्षा भी ग्रहण करे. जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, उसकी रुचि के अनुसार परिवार आगे का निर्णय लेगा. फिलहाल नित्यांश का मन पूरी तरह भक्ति और संस्कारों में रमा हुआ है, जो आज के दौर में बहुत ही कम देखने को मिलता है.