30 साल पहले दुनिया ने देखा क्रिकेट का 7वां अजूबा, एक रिकॉर्ड जो अजेय है

30 साल पहले दुनिया ने देखा क्रिकेट का 7वां अजूबा, एक रिकॉर्ड जो अजेय है


नई दिल्ली. जिसकी गेंदों पर लोग अपने हेलमेट या पैरों के पंजे को बचाते थे उस गेंदबाज को उसकी उस बेमिसाल पारी के लिए हमेशा याद किया जाता है जो क्रिकेट इतिहास की उन अविश्वसनीय कहानियों में से एक है, जो आंकड़ों से ज्यादा साहस और संकल्प की मिसाल पेश करती है. सुल्तान ऑफ स्विंग के नाम से मशहूर वसीम अकरम को दुनिया उनके घातक गेंदबाजी स्पैल के लिए जानती है, लेकिन अक्टूबर 1996 में शेखूपुरा (पाकिस्तान) के मैदान पर उन्होंने बल्ले से जो करिश्मा किया, वह आज भी टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक ‘अछूत’ शिखर की तरह खड़ा है.

जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए उस टेस्ट मैच में वसीम अकरम ने 8वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 257 रनों की पारी खेली थी. यह किसी भी बल्लेबाज द्वारा 8वें या उससे नीचे के क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है.  क्रिकेट पंडितों और विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट के बदलते स्वरूप और पिचों के मिजाज को देखते हुए इस रिकॉर्ड का टूटना लगभग नामुमकिन है. आइए जानते हैं कि यह रिकॉर्ड ‘अजेय’ माना जाता है?

अजेय है अकरम का रिकॉर्ड 

वसीम अकरम के इस रिकॉर्ड की महानता को समझने के लिए हमें क्रिकेट की बारीकियों को समझना होगा.  8वें नंबर पर आने वाले बल्लेबाज को अक्सर ‘लोअर ऑर्डर’ या ‘टेल-एंडर्स’ का हिस्सा माना जाता है. ऐसे में यह रिकॉर्ड टूटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन माना जाता है.

1. गिरते विकेटों का दबाव:

आमतौर पर जब 8वें नंबर का बल्लेबाज मैदान पर आता है, तब टीम की स्थिति या तो बहुत नाजुक होती है (टॉप ऑर्डर का ढहना) या टीम पारी घोषित करने के करीब होती है. वसीम अकरम की उस पारी के दौरान पाकिस्तान ने 183 रन पर 6 विकेट गंवा दिए थे वहां से दोहरा शतक बनाना न केवल कौशल बल्कि मानसिक मजबूती की पराकाष्ठा थी.

2. पुछल्ले बल्लेबाजों का साथ:

किसी भी बल्लेबाज को बड़ा स्कोर बनाने के लिए दूसरे छोर पर साथ की जरूरत होती है. वसीम अकरम ने अपनी पारी के दौरान साकलेन मुश्ताक जिन्होंने 69 रन बनाए के साथ मिलकर 313 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की थी. आज के दौर में जब टीमें 5 गेंदबाजों के साथ खेलती हैं, निचले क्रम के बल्लेबाजों से इतने लंबे समय तक क्रीज पर टिकने की उम्मीद करना बेमानी लगता है.

3. आक्रामक क्रिकेट और टी-20 का प्रभाव:

आधुनिक टेस्ट क्रिकेट अब ‘बैजबॉल’  या आक्रामक शैली की ओर बढ़ रहा है.  निचले क्रम के बल्लेबाज अब रक्षात्मक खेल के बजाय तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं, जिसमें विकेट गिरने का जोखिम अधिक रहता है. 257 रन बनाने के लिए जिस संयम और लंबी बल्लेबाजी जिसमें अकरम ने 363 गेंदें खेली थीं  की आवश्यकता होती है, वह आज के दौर के पुछल्ले बल्लेबाजों में कम ही देखी जाती है.

4. पारी घोषित करने की रणनीति:

आजकल के कप्तान 8वें नंबर के बल्लेबाज के व्यक्तिगत स्कोर के लिए इंतजार नहीं करते. यदि टीम का स्कोर 500 के पार पहुँच जाता है, तो कप्तान विपक्षी टीम को बल्लेबाजी देने के लिए पारी घोषित कर देते हैं.  अकरम के समय में ड्रॉ के लिए खेलना एक विकल्प था, लेकिन आज परिणाम-उन्मुख क्रिकेट में व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ऊपर टीम की रणनीति होती है.

वसीम अकरम की वह 257 रनों की पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक गेंदबाज का बल्ले से दिया गया वह जवाब था जिसने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. उन्होंने उस पारी में 22 चौके और 12 छक्के लगाए थे, जो उस समय एक विश्व रिकॉर्ड था.  आज क्रिकेट में बल्लेबाजी की गहराई बढ़ी है, लेकिन 8वें नंबर पर आकर दोहरा शतक जड़ना और वह भी 250 के आंकड़े को पार करना, एक ऐसा चमत्कार है जो शायद सदियों में एक बार होता है. वसीम अकरम का यह रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट के उन पन्नों में दर्ज है, जिसे समय की धूल भी धुंधला नहीं कर सकती.  यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यह रिकॉर्ड ‘क्रिकेट के सात अजूबों’ में से एक है.



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