क्या फिर बीसीसीआई में वापसी करेंगे अनुराग ठाकुर? SC ने हटाया 9 साल पुराना बैन

क्या फिर बीसीसीआई में वापसी करेंगे अनुराग ठाकुर? SC ने हटाया 9 साल पुराना बैन


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Anurag Thakur News: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई के कामकाज में हिस्सा लेने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. कोर्ट ने 2017 के उस आदेश में संशोधन किया है जिसके तहत उन्हें बोर्ड से अलग किया गया था. अब अनुराग ठाकुर बीसीसीआई की बैठकों और निर्णयों में फिर से शामिल हो सकेंगे.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर (File Photo : BCCI)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को बहुत बड़ी राहत दी है. अदालत ने बीसीसीआई के कामकाज में उनके शामिल होने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. कोर्ट ने साल 2017 के अपने उस फैसले में बदलाव किया है जिसमें उन्हें बोर्ड से दूर रहने को कहा गया था. अनुराग ठाकुर अब बीसीसीआई की बैठकों और अन्य जरूरी कार्यों में हिस्सा ले सकेंगे. वे पहले बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. साल 2017 में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने की वजह से उन्हें पद से हटाया गया था. लोढ़ा कमेटी के नियमों में आयु सीमा और सरकारी पद जैसे कई कड़े प्रावधान शामिल थे. हालांकि अब कोर्ट ने उन्हें फिर से क्रिकेट प्रशासन की मुख्यधारा में लौटने की अनुमति दे दी है. यह फैसला भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा मोड़ ला सकता है.

आखिर क्यों बीसीसीआई से दूर किए गए थे अनुराग ठाकुर?

यह मामला करीब एक दशक पुराना है. साल 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा कमेटी बनाई थी. इस कमेटी का मकसद बीसीसीआई के कामकाज में पारदर्शिता लाना था. लोढ़ा कमेटी ने कई सख्त सिफारिशें दी थीं. इसमें पदाधिकारियों की उम्र, कार्यकाल और मंत्रियों के पद पर रहने को लेकर कड़े नियम थे. उस वक्त अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के अध्यक्ष थे. उन्होंने इन सिफारिशों को लागू करने में आनाकानी की थी. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट और बीसीसीआई के बीच टकराव शुरू हुआ था. अदालत ने इसे आदेश की अवमानना माना था. इसके बाद जनवरी 2017 में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया. अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पदों से हटा दिया गया था.

लोढ़ा कमेटी की वो कौन सी शर्तें थीं जिन्होंने मचाया था बवाल?

लोढ़ा कमेटी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए कई कड़े रिफॉर्म्स सुझाए थे. इसमें ‘वन स्टेट वन वोट’ का नियम सबसे चर्चित रहा था. इसके अलावा कोई भी मंत्री या सरकारी कर्मचारी बोर्ड का पदाधिकारी नहीं बन सकता था. कमेटी ने 70 साल से अधिक उम्र के लोगों के पद संभालने पर भी रोक लगाई थी. कार्यकाल को लेकर भी तीन साल का ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ अनिवार्य किया गया था. बीसीसीआई के कई पुराने सदस्य इन नियमों का विरोध कर रहे थे. अनुराग ठाकुर ने उस वक्त इन बदलावों को पूरी तरह लागू करने से इनकार कर दिया था.

साल 2017 में क्यों हटाए गए थे अनुराग ठाकुर?

जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था. कोर्ट ने पाया कि बोर्ड ने जानबूझकर सुधारों को लागू करने में देरी की. उन पर अदालत को गुमराह करने और झूठी गवाही देने के भी आरोप लगे थे. इसके बाद से ही उन पर बीसीसीआई के किसी भी मामले में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा हुआ था. कोर्ट ने तब एक प्रशासनिक समिति (CoA) बनाई थी. यह समिति बोर्ड का कामकाज देखने लगी थी.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें

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