Rat Control Tips: खेतों में चूहों की समस्या आज किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन चुकी है. गेहूं हो, धान हो, मक्का हो या फिर गन्ना चूहे हर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. किसान जितना अनाज खेत में उगाता है, उसका बड़ा हिस्सा चूहे बर्बाद कर देते हैं. हैरानी की बात ये कि चूहे जितना अनाज खाते नहीं हैं, उससे कहीं ज्यादा वे पौधों की जड़ें काटकर, तनों को कुतरकर और खेत में सुरंग बनाकर नुकसान पहुंचाते हैं.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों की याददाश्त और सूंघने की क्षमता बेहद तेज होती है. यही वजह है कि अगर एक बार वे किसी साधारण जहर को पहचान लें, तो दोबारा उसे खाते ही नहीं हैं. आप कह सकते हैं कि चूहे बेहद समझदार होते हैं. ऐसे में खेत को चूहा मुक्त करने के लिए पुराने तरीकों से हटकर वैज्ञानिक और समझदारी भरे उपाय अपनाना जरूरी हो जाता है.
क्यों खतरनाक हैं खेत के चूहे?
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि हर साल देश में लाखों टन अनाज सिर्फ चूहों की वजह से नष्ट हो जाता है. एक चूहा अपने पूरे जीवनकाल में करीब 10 किलो अनाज खा सकता है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा नुकसान वह फसलों को जड़ से काटकर करता है. सबसे बड़ी चिंता की बात ये कि चूहे बहुत तेजी से प्रजनन करते हैं. एक जोड़ा चूहा सालभर में 50 से ज्यादा बच्चे पैदा कर सकता है. यही कारण है कि अगर समय रहते रैट कंट्रोल नहीं किया गया, तो कुछ ही दिनों में पूरा खेत चूहों से भर जाता है.
कैसे पहचानें खेत में चूहों का प्रकोप?
रैट कंट्रोल शुरू करने से पहले यह पहचानना जरूरी है कि खेत में चूहे हैं या नहीं. इसके लिए कुछ साफ संकेत मिलते हैं. खेत में बिलों के आसपास ताजी खुदी हुई मिट्टी के छोटे-छोटे ढेर दिखाई देना, पौधों की जड़ों के पास कटे हुए तने, पत्तियों और तनों पर दांतों के निशान, खेत में बने छोटे रास्ते और काले दानों जैसी चूहों की बीट. अगर ये निशान दिखें तो समझ जाइए कि चूहे खेत पर हमला कर चुके हैं. तुरंत नियंत्रण जरूरी है. चूहे सिंचाई की पाइपलाइन, ड्रिप सिस्टम, प्लास्टिक शीट और दूसरे कृषि उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसान का खर्च और बढ़ जाता है.
कृषि एक्सपर्ट का तरीका: दावा 3 दिन में असर दिखेगा
जय कृषि किसान क्लीनिक के नवनीत रेवापाटी का दावा है कि खेतों में चूहों को नियंत्रित करने के लिए जिंक फॉस्फाइड का सही तरीके से इस्तेमाल बेहद असरदार है. इसके लिए 10 ग्राम जिंक फॉस्फाइड पाउडर लें और इसे आटे या बेसन में अच्छी तरह मिलाएं. इसमें थोड़ा सा खाने का तेल मिलाएं, ताकि मिश्रण चिपचिपा हो जाए. अब मटर के दाने के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इन्हें चूहों के बिलों के पास रखें. एक और तरीका है कि जिंक फॉस्फाइड को मुरमुरे या भुने हुए चावल के साथ मिलाकर बिलों के आसपास डाल दिया जाए. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर 2 से 3 दिन में ही चूहों की संख्या तेजी से कम होने लगती है.
ब्रोमाडियोलोन: धीरे असर, बड़ा फायदा
एक्सपर्ट के अनुसार, रैट कंट्रोल के लिए ब्रोमाडियोलोन भी एक बेहद कारगर दवा है. यह दवा चूहों के शरीर में धीरे-धीरे असर करती है, जिससे दूसरे चूहे इसे पहचान नहीं पाते. इस दवा से चूहों के शरीर में आंतरिक रक्तस्राव होता है और कुछ दिनों में उनकी मौत हो जाती है. बाजार में यह दवा ब्लॉक, पाउडर और पेस्ट के रूप में उपलब्ध है. तैयार ब्लॉक्स को सीधे चूहों के बिलों के पास रखा जा सकता है, जबकि पाउडर को गेहूं या मक्के के दानों में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. इसका असर लंबे समय तक रहता है और इसे खेत, गोदाम और घर, तीनों जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.
देसी उपाय भी कारगर
केवल दवा पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. कुछ देसी तरीके भी चूहों को भगाने में मदद करते हैं. नीम की पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाएं और यह घोल चूहों के बिलों में डाल दें. नीम की तेज गंध चूहों को वहां से भागने पर मजबूर कर देती है. इसके अलावा लहसुन और हरी मिर्च को पीसकर पानी में मिलाएं और इस घोल को चूहों के रास्तों और बिलों के पास छिड़क दें. इससे चूहे उस इलाके से दूर रहने लगते हैं.