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Sucess Story: बालाघाट के एक शिक्षक ने रिटायरमेंट के बाद सुकून नहीं, आधुनिक खेती को चुना. जिस खेत में कभी सिर्फ धान उगता था, आज वहां सब्जी, फल, फूल, मछली, मुर्गी पालन बहुत कुछ है. कमाई भी लाखों में हो रही है. शिक्षक ने इस उम्र में ये सब कैसे किया, ये गजब फंडा है. आप भी जानें…
Balaghat News: एक दौर था जब खेती सिर्फ जीवन यापन का साधन हुआ करती थी. किसान सिर्फ पारंपरिक तरीके से अपने खेत में एक ही फसल एक ही पद्धति से करते थे. नतीजतन खेती में उपज कम होने लगी और भूमि पर भी असर पड़ने लगा. लेकिन, अब किसान अपना तरीका बदल रहे हैं. अब खेती व्यवसायिक रूप ले रही है. एक ऐसे ही आदर्श किसान हरीश सुल्खे बालाघाट से महज 5 किलोमीटर दूर बगदरा गांव में रहते हैं, जिन्होंने बतौर टीचर जिंदगी भर काम किया. फिर रिटायरमेंट के बाद किसानी में दूसरी पारी शुरू की. इस दौरान उन्होंने सात एकड़ जमीन में मेहनत की और खेती को फायदे का धंधा बनाया. जानिए कहानी…
रिटायरमेंट के बाद शुरू की खेती
आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद सुकून से रहना चाहते हैं. लेकिन, बालाघाट के हरिश सुल्खे ने अपनी पैतृक भूमि पर व्यवसायिक खेती की. इससे पहले उनके खेत में सिर्फ धान की खेती होती थी. लेकिन, पारंपरिक खेती में उतना उत्पादन नहीं हुआ. अब उन्होंने सात एकड़ जमीन पर अलग-अलग तरह की फसलों का उत्पादन किया. उन्होंने खेत में केले के साथ धान, गन्ना, गेंदा, ककड़ी खीरा, केले की खेती की. साथ ही मुर्गी और मछली पालन का काम भी शुरू किया.
गन्ने की खेती से शुरुआत
रिटायर्ड टीचर हरीश सुल्खे ने बताया, उन्होंने खेती की शुरुआत एक एकड़ में गन्ने की फसल प्रयोग के तौर पर लगाई. उसमें अंतर्वर्ती फसल के रूप में खीरा और तरबूज लगाया. साथ ही मुर्गी पालन और मछली पालन किया. इससे उनकी आमदनी में जबरदस्त उछाल आया. महज 2 महीने में ही 3 लाख रुपये के खीरा-ककड़ी, तरबूज का उत्पादन मिला. गन्ना फसल से 2 लाख और मछली पालन से 2 लाख की इनकम हुई. इस तरह से उन्हें कुल 6 लाख रुपये की आय हुई.
साल में दो बार लेते उत्पादन
12 हजार फिंगर साइज मछली, जिसमें कामन कार्प एवं रुपचंदा मछली है. यह मछली लगभग 200 से ढाई सौ ग्राम की हो जाएगी, तब उन्हें बड़े तालाब में डाल दिया जाएगा. जहां यह मछलियां लगभग चार से पांच माह में 1 किलोग्राम से अधिक वजन की हो जाएंगी. बड़े तालाब में वर्तमान में 8 हजार मछलियां हैं, जो कि जल्द ही 1 किलो से ऊपर की हो जाएंगी. हरीश का कहना है कि इस आधा एकड़ के तालाब से लगभग 8 लाख रुपये की आय होने की संभावना है. मत्स्य पालन के काम में उन्होंने 3 लाख 50 हजार रुपये खर्च किए हैं.
इधर बागवानी से भी कमाई
उन्होंने अपने फार्म पर कई तरह की सब्जियों की खेती शुरू की है. इसमें फूल गोभी, मूली, बैंगन सहित दूसरी सब्जियों का उत्पादन किया. इसके अलावा खेत में फूलों की भी खेती शुरू की, जिससे उनकी आय में जबरदस्त उछाल आया. ऐसे में उनका मानना है कि खेती में रिस्क होता है. अगर-अगर अलग-अलग फसलें रहेगी, तो एक फसल में नुकसान होने पर उसकी भरपाई दूसरी खेती से भी हो सकती है. वहीं, आसपास के गांव के किसान भी उनका खेत देखने आते हैं और उनसे प्रेरणा लेकर अपनी नई खेती शुरु करते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें