मंडला जिले के मोहगांव थाना क्षेत्र में अप्रैल माह में हुई गोलू नंदा की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी जांच पूरी न होने और किसी पर कार्रवाई न होने से असंतुष्ट परिजन दोबारा एसपी कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। गोलू नंदा 16 अप्रैल को लापता हो गया था। 19 अप्रैल को उसका शव गांव से करीब 5 किलोमीटर दूर दुर्गम जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ मिला। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। परिजनों ने आरोप लगाया कि कठिन रास्ते और अंधेरा होने के कारण पर्याप्त रोशनी और डॉक्टर की अनुपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम जंगल में ही कर दिया गया और वहीं दफना दिया गया। परिजनों के अनुसार, गोलू के हाथ-पैर और शरीर पर चोट के कई निशान थे, जिससे उन्हें यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला लगा। हालांकि, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण आत्महत्या बताया गया, जिससे परिजन शुरू से ही असंतुष्ट थे। लगातार शिकायतों के बाद, लगभग छह महीने बाद प्रशासन ने शव को निकलवाने का आदेश दिया। पुलिस, तहसीलदार, डॉक्टर और परिजनों की उपस्थिति में शव को जंगल से निकालकर मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजा गया, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। हालांकि, शव निकाले जाने के बाद भी अब तक न तो जांच पूरी हुई है और न ही कोई कार्रवाई की गई है। इसी कारण परिजन एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुंचे और न्याय की मांग की। परिजनों ने गोलू की कथित प्रेमिका के परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया है। एसडीओपी करेंगे मामले की जांच इस मामले पर एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि परिजनों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर असहमति जताने के बाद दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। परिजनों द्वारा बताए गए सभी तथ्यों का विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच में हत्या के ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। लेकिन परिजनों ने अब कुछ नए तथ्य प्रस्तुत किए हैं। इनकी जांच के लिए एसडीओपी को निर्देश दिए जा रहे हैं।
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