मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। अब आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा। अब मामले में 6 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे सजा की मात्रा पर सुनवाई की जाएगी। यह मामला मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था और 7 नवंबर 2024 को दी गई अनुमति रद्द की जा चुकी थी। निगम ने यह भी कहा कि 14 मई 2025 को नोटिस जारी किया गया था और इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के (2025) 5 SCC 1 के फैसले में तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो कानूनन गलत है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि बिना शर्त माफी के साथ तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। लेकिन नगर निगम आयुक्त ने अदालत में स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(b) के तहत दोषी ठहराया है। ये खबर भी पढ़ें… कम्प्यूटर टीचर्स की आउटसोर्सिंग पर रोक…
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पोस्टेड कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को आउटसोर्स व्यवस्था में लाने के फैसले पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने सरकार, लोक शिक्षण संचालनालय और समग्र शिक्षा अभियान को नोटिस जारी किया है। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।पूरी खबर पढ़ें
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