अनूपपुर. जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम कोठी में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है. करीब चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह केंद्र वर्ष 2023 में शुरू हुआ था. उद्देश्य था कि आसपास के हजारों ग्रामीणों को यहीं बेहतर इलाज मिले. लेकिन हकीकत यह है कि तीन साल बीतने के बावजूद यहां एक भी डॉक्टर की पदस्थापना नहीं हो सकी. नतीजतन यह अस्पताल भवन, मशीनों और रिकॉर्ड तक सीमित रह गया है. इलाज के नाम पर मरीजों को आज भी कई किलोमीटर दूर भटकना पड़ रहा है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोठी को 24 घंटे संचालित होना था. नियमों के मुताबिक ऐसे केंद्रों में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और जरूरी संसाधन उपलब्ध होने चाहिए. लेकिन कोठी का CHC सुबह और शाम तय समय पर ही खुलता है. शाम पांच बजे के बाद अस्पताल में ताला लटक जाता है. यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी है.
करोड़ों की इमारत, डॉक्टर शून्य
ग्राम कोठी में बना यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया. भवन आधुनिक है. एक्स-रे मशीन और अन्य उपकरण भी उपलब्ध हैं. लेकिन डॉक्टर की गैरमौजूदगी के कारण ये सुविधाएं बेकार साबित हो रही हैं. इलाज की जिम्मेदारी पूरी तरह स्टाफ नर्सों पर आ गई है.
कागजों में स्टाफ, जमीनी सच्चाई अलग
रिकॉर्ड के अनुसार यहां करीब आठ कर्मचारियों की तैनाती दिखाई गई है. इनमें स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल कुछ स्टाफ नर्सों और एक कंपाउंडर के भरोसे चल रहा है. डॉक्टर नहीं होने से मरीजों की संख्या लगातार घटती गई. अब हालात यह हैं कि ग्रामीण यहां आना ही छोड़ चुके हैं.
मरीजों की मजबूरी, बढ़ता खर्च
डॉक्टर की अनुपस्थिति में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या आसपास के कस्बों में ले जाना पड़ता है. इससे इलाज में देरी होती है. समय और पैसे दोनों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है. कई मामलों में यह देरी मरीजों की जान पर भी भारी पड़ सकती है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में यह अस्पताल किसी काम का नहीं रह गया है.
24 घंटे सेवाएं देनी चाहिए, लेकिन तय समय पर खुलता-बंद होता अस्पताल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद कोठी का यह अस्पताल सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक और फिर शाम 4 से 5 बजे तक ही खुलता है. इसके बाद स्टाफ ताला लगाकर चला जाता है. नियमों के अनुसार CHC को 24 घंटे सेवाएं देनी चाहिए. लेकिन यहां समय सारिणी के हिसाब से इलाज होता है.
अधिकारी भी मान चुके हैं कमी
जानकारी के अनुसार, खंड चिकित्सा अधिकारी ने करीब पांच महीने पहले जिला मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर कोठी में डॉक्टर की पदस्थापना की मांग की थी. उस पत्र में यह भी उल्लेख है कि ग्रामीण लगातार 181 पर शिकायत दर्ज करा रहे हैं. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
लापरवाही या सिस्टम फेल
जब जिम्मेदार अधिकारी खुद डॉक्टर की कमी स्वीकार कर चुके हैं, तो नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है. यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच आम हो चुका है. करोड़ों की लागत से बना यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवा का केंद्र कम और सरकारी उदासीनता का उदाहरण ज्यादा बन गया है.
ग्रामीणों की उम्मीद और सवाल
कोठी और आसपास के गांवों के लोग अब भी डॉक्टर की नियुक्ति की आस लगाए बैठे हैं. सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सिर्फ कागजों में ही मिलती रहेगी. या फिर कभी यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वास्तव में जीवन रेखा बन पाएगा.