सीहोर. जिले की इछावर विधानसभा में आयोजित एक शासकीय कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का लाड़ली बहना योजना को लेकर दिया गया बयान सियासी विवाद का कारण बन गया. मंच से मंत्री ने कहा कि यदि लाड़ली बहनें सरकारी आयोजन में शामिल नहीं हुईं तो उनका नाम योजना से कट सकता है. इस बयान का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बयान को “धमकी” करार देते हुए विपक्ष ने इसे महिलाओं के स्वाभिमान पर चोट बताया.
लाड़ली बहना योजना को राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक योजना माना जाता है. ऐसे में योजना से जुड़ा यह बयान राजनीतिक रूप से संवेदनशील साबित हुआ. कांग्रेस ने तुरंत मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार अब लाभार्थियों को डराने की भाषा अपना रही है. विपक्ष का कहना है कि योजना को अधिकार की जगह एहसान की तरह पेश किया जा रहा है.
करण सिंह वर्मा मध्य प्रदेश सरकार में राजस्व मंत्री हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. वे सीहोर जिले की इछावर विधानसभा से आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं. उनका जन्म 1 मई 1957 को सीहोर जिले के जमुनिया हटेसिंह गांव में हुआ. शिक्षा स्नातक तक है और पेशे से वे कृषि से जुड़े रहे हैं. राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने 1975 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से की. इसके बाद भाजपा संगठन में विभिन्न पदों पर रहे. 1985 में पहली बार विधायक बने. शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान वे पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, श्रम, खाद्य प्रसंस्करण और राजस्व जैसे विभाग संभाल चुके हैं. दिसंबर 2023 में मोहन यादव सरकार में उन्हें फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि वे पहले भी कुछ विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं.
बयान के बाद सियासी घमासान
मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि लाड़ली बहनों को धमकाना सत्ता के अहंकार को दिखाता है. कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि योजना जनता के लिए है तो कार्यक्रमों में आने की शर्त क्यों. पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने इसे “जनता के पैसे पर दादागिरी” बताया. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा के मंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे पहले भी विवादित बयान सामने आ चुके हैं. कांग्रेस ने इस पूरे मामले को महिला सम्मान से जोड़ते हुए सरकार को घेरा.
भाजपा का बचाव
भाजपा ने मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया. पार्टी प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केशवानी ने कहा कि लाड़ली बहना योजना का कांग्रेस शुरू से विरोध करती रही है. उनके अनुसार मंत्री का आशय धमकी देने का नहीं था, बल्कि लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और सहभागिता के लिए प्रेरित करना था. भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे ने भी कहा कि योजनाएं बिना भेदभाव के लागू की जा रही हैं और कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है.
क्यों अहम है यह विवाद
लाड़ली बहना योजना सीधे तौर पर महिलाओं से जुड़ी है और इसका राजनीतिक प्रभाव भी बड़ा माना जाता है. ऐसे में मंत्री का बयान केवल एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं रह गया, बल्कि सरकार की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़े करने लगा है. फिलहाल सीहोर से उठा यह विवाद प्रदेश की राजनीति में तेज बहस का विषय बना हुआ है.
क्या कहा था मंत्री करण सिंह वर्मा ने
धामांदा गांव में आयोजित शासकीय कार्यक्रम में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मंच से लाड़ली बहना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकारी आयोजन में लाड़ली बहनें नहीं आएंगी तो उनका नाम काटा जा सकता है. मंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ एक रिपोर्ट लगानी होती है. यह बयान सामने आते ही विवाद का केंद्र बन गया. वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे धमकी करार दिया.
पुराने विवादों की भी याद दिलाई
कांग्रेस ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा के किसी मंत्री का बयान विवाद में आया हो. इससे पहले मंत्री विजय शाह द्वारा लाड़ली बहनों और कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान भी चर्चा में रहे थे. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा नेतृत्व ऐसे बयानों पर चुप्पी साध लेता है.