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Balaghat News: चालक आसिफ हुसैन को स्कूल की बस चलाने से रोक दिया गया जबकि पेशे से इलेक्ट्रिशियन सादिक हुसैन को पिछले 7 दिनों से काम नहीं मिलने की बात भी सामने आई है. प्रभावित मुस्लिम परिवारों ने कहा कि उन्हें किराने का सामान देने से मना किया जा रहा है.
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट को शांति का टापू कहा जाता है. जिले में इससे पहले कभी धार्मिक आधार पर विवाद न हुआ लेकिन बीते दिनों जिला सुर्खियों में रहा और वजह बना, जब कथित तौर पर लांजी तहसील के घोटी-नंदौरा गांव के 10 मुस्लिम परिवारों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार कर दिया गया. इसके बाद से उन परिवारों के जीवन पर गहरा असर पड़ा. ऐसे में उनकी रोजी-रोटी छिन सी गई और जिंदगी पर गहरा असर पड़ा लेकिन ये सब शुरू कैसे हुआ. दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है. इसमें एक शख्स मुस्लिम समुदाय के लोगों के बहिष्कार की बात कर रहा है. इसके बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी. आरोप है कि इसके बाद गांव के करीब 10 मुस्लिम परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया गया.
बस चालक आसिफ हुसैन को स्कूल बस चलाने से रोक दिया गया जबकि इलेक्ट्रिशियन सादिक हुसैन को पिछले 7 दिनों से काम नहीं मिलने की बात सामने आई है. प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें किराने का सामान देने से मना किया जा रहा है और गांव में डर का माहौल बना हुआ है.
कोटवार से करवाई मुनादी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोटवार के जरिए गांव में मुनादी करवाई गई. मुस्लिम समाज के लोगों को किराने का सामान देने से इनकार किया जा रहा है. इसके अलावा बारबर से मुस्लिमों के बाल काटने और दाढ़ी बनाने के लिए मना किया गया है. ऐसे में गांव में तनाव की स्थिति बन गई है.
पूर्व विधायक ने की फ्लैग मार्च निकालने की मांग
इस पूरे मामले में पूर्व विधायक किशोर समरिते ने गंभीर चिंता जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच और गांव में पुलिस फ्लैग मार्च की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि बहिष्कार की घोषणा मुनादी के जरिए कराई गई और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसका समर्थन करते नजर आ रहे हैं. हालांकि बहिष्कार करने का आरोप झेल रहे नेतराम तिड़के ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गांव में किसी भी मुस्लिम परिवार का बहिष्कार नहीं किया गया है.
बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले को सुलझा लिया गया है. इसमें नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी और दोनों समुदाय के लोगों को बुलाकर बैठक की गई. इस दौरान आला अधिकारी भी मौजूद थे. बैठक में जो भी बातें थीं, उन्हें समझकर दूर किया गया. वहीं कुछ युवाओं ने जोश में आकर कुछ गलत कह दिया था. उन्होंने भी अपनी गलती मानी. अब उस गांव सभी लोग बड़े ही सौहार्दपूर्ण तरीके से रह रहे हैं. हम उस एरिया की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.