छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत दौड़न बांध स्थल पर आदिवासी महिलाओं का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन (शनिवार) भी जारी रहा। सैकड़ों की संख्या में मौजूद महिलाओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनके अधिकारों की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा। स्थिति को संभालने के लिए दूसरे दिन एसडीएम विजय द्विवेदी, तहसीलदार, कई पटवारी और पुलिस बल सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने निर्माण कार्य से जुड़े मुद्दों पर महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं और प्रशासन के बीच बहस हो गई। महिलाओं ने प्रशासन की मनमानी के विरोध में जोरदार नारेबाजी की और उन्हें खाली हाथ लौटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने प्रशासन पर कानून की खुली अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अब प्रशासन की मनमानी और तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगी। प्रदर्शनकारी महिलाओं के आक्रोश और एकजुटता को देखते हुए प्रशासन बिना किसी सहमति के वापस लौट गया। बोलीं- हक-अधिकार सुनिश्चित किए जाएं
महिलाओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि जल-जंगल-जीवन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। उनका कहना है कि जब तक उनके हक और अधिकार सुनिश्चित नहीं किए जाते, तब तक वे बांध स्थल से नहीं हटेंगी। प्रदर्शन में सहयोग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि प्रशासन अब भी कानून का पालन करने को तैयार नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपनी तानाशाही छोड़कर कानून और मानवता के रास्ते पर आने का आग्रह किया। भटनागर ने जोर दिया कि संवाद के सभी रास्ते अभी खुले हैं और कलेक्टर तथा वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि झूठे वादों और खोखली बातों से अब लोग मानने वाले नहीं हैं, और यदि समय रहते सार्थक संवाद नहीं हुआ, तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलनकारी संवाद के पक्षधर हैं, लेकिन वह संवाद कानून के दायरे में और सम्मान के साथ होना चाहिए।
Source link