Last Updated:
भिंड में एक शादी ऐसी हुई जिसने मिसाल पेश कर दी है. दूल्हे के पिता ने शगुन के 51 लाख रुपए वापस कर दिए. इसके बाद सिर्फ एक रुपया और नारियल लेकर शादी की. दूल्हे के पिता ने कहा कि सबसे बड़ा दहेज तो मेरे लिए आपकी बेटी है, जिसे लालन पालन करके इस लायक बनाया. पाठक परिवार की दहेज की कुरीति को मिटाने की पहल की सभी तरफ तारीफ हो रही है.
दुल्हे के परिवार ने पैसे लेने से किया मना
चंबल का भिंड हमेशा सुर्खियों में रहता है लेकिन आज भिंड शहर के रहने वाले पाठक परिवार की शादी की चर्चा हो रही है, जो समाज में एक फैली हुई दहेज की कुरीति को मिटाने में अच्छा संदेश दे रही है. दरअसल मामला भिंड शहर के खिड़कियां मोहल्ले में रहने वाले पाठक परिवार का है. अनोज पाठक के बेटे आकर्ष, जो कि छत्तीसगढ़ के रायगढ स्थित जिंदल स्टील कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर पर हैं, जिनका विवाह जबलपुर के रहने वाले विनोद उपाध्याय की बेटी अनिक्षा के साथ धूम धाम से शहर के जगदीश गार्डन में सम्पन्न हुआ.
दूल्हे के पिता ने लिया सिर्फ एक रुपया और नारियल
विवाह से पहले तब लोग हैरानी में पड़ गए जब दुल्हन के पिता ने लगुन फलदान में 41 लाख रुपए का चेक और नारियल कपड़ा मिठाई के साथ 10 लाख रुपए नगद परात में रखे, लेकिन खास बात तो यह है कि दूल्हे आकर्ष के पिता अनोज पाठक ने बड़ा दिल दिखाकर समाज में दहेज लोभियों को कड़ा संदेश दे डाला और सिर्फ एक रुपए और नारियल लेकर पूरे रुपए वापस दुल्हन के पिता के हाथ में रख दिए थोड़ी देर तक सभी लोग हैरान हो गए.
वधू पक्ष के लोगों को ऐसा लगा कि शायद कोई कमी रह गई इसलिए लाखों रुपए वापस कर दिए, लेकिन इस दौरान दूल्हे के बाबा सुरेश दादा ने लोगों के सामने साफ संदेश दिया कि हमारे पूरे परिवार की सहमती से ही हम सभी ने ये फैसला लिया है कि दहेज के कलंक को खत्म करने के लिए यह दहेज प्रथा बंद होनी चाहिए.
पाठक के परिवार की हो रही तारीफ
दहेज की कुप्रथा से न जाने कितनी बेटियां कोख में ही मार दी जाती हैं और संस्कारित परिवार की होनहार बेटियां दहेज लोभियों के चंगुल में फंसकर मानसिक शारीरिक प्रताड़ित होने की अक्सर खबरें मन व्यथित कर देती हैं. लेकिन पाठक परिवार के इस फैसले से बेटियां अब बोझ नहीं बनेंगी. दूल्हे के पिता अनोज पाठक ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए कहा कि हमारे दो बेटे हैं इसलिए हम बहू के रूप में बेटी घर लाएंगे. विवाह के दौरान और बाद में भी दोनों परिवारों की चारों ओर प्रशंसा की जा रही है.