23 साल बाद वैभव ने पॉन्टिंग की याद ताजा करा दी, फाइनल की दो बेस्ट पारियां

23 साल बाद वैभव ने पॉन्टिंग की याद ताजा करा दी, फाइनल की दो बेस्ट पारियां


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वैभव की पारी ने 2003 वर्ल्ड कप में रिकी पॉंटिंग की पारी की यादें ताजा करा दी. भारत के कप्तान सौरव गांगुली को आज भी वो पारी याद है और अक्सर उसका जिक्र करते है. पॉन्टिंग की उस पारी में भारतीय टीम को झकझोर कर रख दिया था. जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया एकतरफा मुकाबला जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बना था.

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वैभव सूर्यवंशी की पारी ने 2003 वर्ल्ड कप में पॉन्टिंग के बैट से निकली पारी याद करा दी

नई दिल्ली. लगातार छह फ़ाइनल और 100 रनों की दमदार जीत. अगर भारतीय क्रिकेट की मौजूदा ताकत का कोई ठोस सबूत चाहिए था, तो अंडर-19 वर्ल्ड कप फ़ाइनल ने वह पूरी तरह पेश कर दिया. वैभव सूर्यवंशी ने ज़िंदगी की सबसे यादगार पारी खेलकर मंच सजाया और उनके साथियों ने यह सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड की शुरुआती जुझारू कोशिश के बावजूद कोई चमत्कार न हो सके. वैभव की इस पारी ने कई क्रिकेट पंडितों को फ्लैश बैक में भेज दिया.

वैभव की पारी ने 2003 वर्ल्ड कप में रिकी पॉंटिंग की पारी की यादें ताजा करा दी. भारत के कप्तान सौरव गांगुली को आज भी वो पारी याद है और अक्सर उसका जिक्र करते है. पॉन्टिंग की उस पारी में भारतीय टीम को झकझोर कर रख दिया था. जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया एकतरफा मुकाबला जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बना था.

वैभव सूर्यवंशी जैसी पारी पॉन्टिंग ने 23 साल पहले खेली

वैभव सूर्यवंशी की यह पारी बिल्कुल रिकी पोंटिंग के अंदाज़ की थी, 2003 के फ़ाइनल की याद दिलाने वाली. उस मैच में भी पॉन्टिंग ने पहले बल्लेबाजी की और 121 गेंदों पर नाबाद 140 रन की पारी खेली थी.23 साल बाद वैभव भी मानो किसी जुनून में बल्लेबाज़ी कर रहे थे. दोनों पारियों में एक बात कॉमन थी और वो थी विरोधी को नेस्तनाबूद कर देना. सेमीफ़ाइनल में 33 गेंदों पर 68 रन बनाने के बाद फ़ाइनल में यह प्रदर्शन सचमुच असाधारण था. अतीत में उनके स्वभाव और धैर्य पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन लगता है कि एशिया कप और इस वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मिले अनुभवों से उन्होंने सीख ली.फ़ाइनल में यह एक दर्शनीय और प्रभावशाली पारी थी.

200 से ऊपर के स्ट्राइक-रेट के साथ वैभव ने यह सुनिश्चित किया कि ब्रेक तक भारत पूरी तरह हावी रहे. एक ओवर ऐसा भी आया जब उन्होंने इंग्लिश गेंदबाज़ी आक्रमण की मानसिक मज़बूती तोड़ दी विकेट के दोनों ओर कई छक्के लगाए. गेंदबाज़ हताश नज़र आया और वहीं से मैच का रुख़ तय हो गया.वैभव भारत के लिए ही नहीं, अपने लिए भी मानसिक लड़ाई जीत रहे थे। रविचंद्रन अश्विन ने ट्वीट किया कि शायद अब ज़्यादा समय नहीं लगेगा जब वैभव राष्ट्रीय टीम का दरवाज़ा खटखटाएँगे और सीनियर स्तर पर अपनी छाप छोड़ेंगे.

महात्रे की लीडरशिप

आयुष म्हात्रे का ज़िक्र भी ज़रूरी है क्योंकि कप्तान के रूप में आयुष ने शानदार भूमिका निभाई. उन्होंने टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ को समझदारी से खेला, जिससे वैभव खुलकर आक्रमण कर सके और शुरुआती बढ़त बना सकें. फ़ाइनल में एक अहम पारी और निर्णायक मौकों पर विकेट लेकर आयुष ने कप्तान के रूप में अपनी स्पष्ट छाप छोड़ी. अब जब नज़रें पुरुषों के टी20 वर्ल्ड कप पर हैं, तो यह रुककर सोचने का सही समय है कि भारतीय क्रिकेट की नींव इस वक्त कितनी मज़बूत है. बीसीसीआई और कोचिंग स्टाफ़ पुरुष और महिला दोनों सेट अप में इसका श्रेय पाने के हक़दार हैं.
अंत में, यह तथ्य कि भारत वैभव और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों को बेंच पर बैठा सकता है, इसी गहराई और ताकत को दर्शाता है. कोई भी प्रतिद्वंद्वी उन्हें अपनी पहली एकादश में पाने के लिए कुछ भी कर गुज़रे। फिलहाल, वैभव और पूरी टीम का जश्न मनाने का वक्त है और सूर्याकुमार यादव और उनकी टीम के टाइटल डिफ़ेंस के लिए तैयार होने का भी. कम से कम एक दिन के लिए पाकिस्तान से जुड़ी सारी शोरगुल वाली बातें पीछे रखी जा सकती हैं.

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