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Matra vadi recipe : सर्दी का मौसम खत्म होने को है और बाजार में हरी मटर सस्ते दामों पर मिल रही है. ऐसे में हरी मटर की वड़ी बनाने का यह सबसे अच्छा समय है. ताजी मटर और भीगी मूंग दाल को पीसकर, मसाले मिलाकर धूप में सुखाई गई वड़ी सालभर तक सुरक्षित रहती है. खास बात यह है कि इसे कई सब्जियों में उपयोग लिया जा सकता है.
Food Recipe : मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही पारंपरिक और वड़ी (बड़ी) बनाने की परंपरा शुरू हो जाती है, जो स्थानीय व्यंजनों का एक प्रमुख हिस्सा है. इनमें हरी मटर से बनी वड़ी सबसे प्रमुख है, जिसे उड़द दाल और मसालों के साथ धूप में सुखाकर साल भर के लिए स्टोर किया जाता है. रसोईया गुड़िया सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सर्दियों के मौसम में हरी मटर से बनाई जाने वाली वड़ी एक पारंपरिक व्यंजन है. यह न केवल मौसम में मटर का स्वाद लेने का एक तरीका है, बल्कि इसे सुखाकर पूरे साल के लिए स्टोर भी किया जा सकता है.
ऐसे बनती है मटर वड़ी
मटर की वड़ी बनाने के लिए सबसे पहले ताजी हरी मटर को छीलकर धोया जाता है. इसके बाद मटर को एक मिनट के लिए उबलते पानी में डालकर हल्का पकाया जाता है. जिससे उसका कच्चापन दूर हो जाए। ठंडा करने के बाद मटर को मिक्सी में दरदरा पीस लिया जाता है. इसमें पानी नहीं डाला जाता. अब इसमें 2-3 घंटे भिगोई हुई मूंग दाल का पेस्ट मिलाया जाता है, जिससे वड़ी को सही बाइंडिंग और स्वाद मिलता है. इसके बाद जीरा, काली मिर्च, हींग, लौंग, बड़ी इलायची, अदरक और हरी मिर्च मिलाई जाती है. इस मिश्रण को 10 मिनट तक अच्छी तरह फेंटा जाता है, ताकि पेस्ट हल्का और फूला हुआ हो जाए.
तैयार मिश्रण से थाली या प्लास्टिक शीट पर छोटी-छोटी वड़ी बनाई जाती हैं और इन्हें 2 से 5 दिन तक तेज धूप में सुखाया जाता है. रात में वड़ी को अंदर रख लिया जाता है, ताकि नमी न लगे। जब वड़ी पूरी तरह सुख जाए, तो इन्हें डिब्बे में भरकर रख लिया जाता है. आलू-वड़ी, बैंगन-वड़ी, पनीर-वड़ी या फिर कढ़ी में वड़ी डालकर देसी स्वाद का आनंद लिया जाता है. सब्जी बनाने से पहले वड़ी को हल्का सा तल लिया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
सेहत के लिए भी फायदेमंद
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा के अनुसार हरी मटर और मूंग दाल से बनी वड़ी प्रोटीन, फाइबर और आयरन से भरपूर होती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है, कब्ज की समस्या कम करती है और लंबे समय तक पेट भरा रखती है। इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को ताकत देता है, जबकि फाइबर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है. संतुलित मात्रा में इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें