भोपाल. मध्य प्रदेश में इस बार सरकारी स्कूलों की नौवीं और 11वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं पूरी तरह नई व्यवस्था में कराई जा रही हैं. परीक्षा संचालन से लेकर प्रश्नपत्र सुरक्षा और मूल्यांकन तक, पूरी व्यवस्था को बोर्ड परीक्षा के समान बनाया गया है. शिक्षा विभाग का दावा है कि इससे परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों में अनुशासन व गंभीरता विकसित होगी. अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय डीएस कुशवाहा ने बताया कि यही कारण है कि प्रश्नपत्रों को थानों में सुरक्षित रखने, तय समय से पहले बंडल न खोलने और बोर्ड जैसी अंक योजना लागू करने जैसे सख्त कदम उठाए गए हैं. इससे टीचर्स, परीक्षा से जुड़े स्टाफ से लेकर परीक्षा देने वाले छात्र-छात्राओं को सख्त निगरानी का संदेश जाएगा. शिक्षा और परीक्षा से जुड़े अफसरों का कहना है कि बच्चों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है.
अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय डीएस कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश में यह पहला मौका है, जब 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं को बोर्ड परीक्षा के समकक्ष मानते हुए तैयारियां की गई हैं. प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन की निगरानी और समयबद्ध परिणाम घोषित करने पर विशेष जोर दिया गया है. शिक्षा विभाग मानता है कि यह व्यवस्था छात्रों को आगे की बोर्ड परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करेगी और परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा बढ़ाएगी.
बोर्ड पैटर्न पर क्यों कराई जा रही हैं परीक्षाएं
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, पिछले वर्षों में स्कूल स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, मूल्यांकन में भिन्नता और परिणाम में देरी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं. इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए नौवीं और 11वीं की परीक्षाओं को बोर्ड पैटर्न पर लाने का निर्णय लिया गया है. प्रश्नपत्र मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए हैं और मूल्यांकन माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगा.
थाने में रखे गए प्रश्नपत्र, 60 मिनट पहले निकलेगा बंडल
परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को बोर्ड परीक्षा की तरह पुलिस थानों में सुरक्षित रखा गया है. परीक्षा वाले दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे. पुलिस थाने से प्रश्नपत्रों का बंडल परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले निकाला जाएगा. छात्रों को परीक्षा कक्ष में बैठने के बाद प्रश्नपत्र पांच मिनट पहले वितरित किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे.
परीक्षा कार्यक्रम और समय का ध्यान रखें, 30 मिनट पहले पहुंचना ही होगा
अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय डीएस कुशवाहा ने बताया कि नौवीं और 11वीं की परीक्षाएं एक ही पाली में दोपहर 1.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक संचालित होंगी. छात्रों को परीक्षा केंद्र पर आधा घंटा पहले पहुंचना अनिवार्य होगा. शिक्षा विभाग के अनुसार, समय से पहले पहुंचने से प्रवेश और उपस्थिति प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ा शेड्यूल
| कक्षा | परीक्षा अवधि | समय | मूल्यांकन पूरा होने की तारीख |
|---|---|---|---|
| 9वीं | 2 मार्च से 17 मार्च | 1.30 PM से 4.30 PM | 23 मार्च |
| 11वीं | 23 फरवरी से 17 मार्च | 1.30 PM से 4.30 PM | 23 मार्च |
चार सेट में तैयार किए गए प्रश्नपत्र
नौवीं और 11वीं के सभी विषयों के प्रश्नपत्र चार अलग-अलग सेट में तैयार किए गए हैं. इन सेटों को ए, बी, सी और डी नाम दिया गया है. छात्रों को रोटेशन के आधार पर प्रश्नपत्र वितरित किए जाएंगे, जिससे नकल की संभावना कम हो सके. यह व्यवस्था भी पूरी तरह बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित है.
मूल्यांकन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव
इस बार उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन विकासखंड स्तर पर बनाए गए उपकेंद्रों पर कराया जाएगा. हर जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों को समन्वयक केंद्र बनाया गया है. परीक्षा के बाद केंद्राध्यक्ष उत्तरपुस्तिकाएं अपनी निगरानी में उत्कृष्ट विद्यालय में जमा कराएंगे. वहां के प्राचार्य अलग-अलग स्कूलों को उत्तरपुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए आवंटित करेंगे, जिससे निष्पक्षता बनी रहे.
Q&A से समझिए नई व्यवस्था
सवाल 1. प्रश्नपत्र थानों में रखने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब. प्रश्नपत्रों के बहुप्रसारण और लीक की आशंका को खत्म करने के लिए यह व्यवस्था की गई है. बोर्ड परीक्षा की तरह सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है.
सवाल 2. क्या इससे छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा?
जवाब. शिक्षा विभाग का कहना है कि यह दबाव नहीं, बल्कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी का अभ्यास है, जिससे आगे छात्रों को फायदा होगा.
सवाल 3. मूल्यांकन में देरी तो नहीं होगी?
जवाब. विभाग के अनुसार, 23 मार्च तक मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया जाएगा और परिणाम जल्द घोषित किए जाएंगे.
शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर भी साफ निर्देश
नौवीं और 11वीं की परीक्षा से 10वीं और 12वीं के मूल्यांकन में लगे शिक्षकों को मुक्त रखा गया है. इन परीक्षाओं के पर्यवेक्षण कार्य में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि बोर्ड परीक्षाओं का काम प्रभावित न हो. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नौवीं और 11वीं की परीक्षाओं में इस साल करीब 20 लाख छात्र शामिल होंगे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी थी.