विदिशा में बेतवा नदी के सूखने और बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी संबंध में एक सामाजिक संगठन ने रविवार को रंगई क्षेत्र के पास सूखी पड़ी बेतवा नदी के बीच बैठक की। संगठन ने नदी संरक्षण, गाद निकासी और गहरीकरण के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए के दावों पर सवाल उठाए। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से बेतवा नदी की सफाई, गाद निकासी और गहरीकरण के लिए बड़ी राशि खर्च करने का दावा किया जाता रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदी की धारा कई स्थानों पर टूट चुकी है और यह जगह-जगह सूखी दिखाई दे रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि संगठन जल्द ही जिला कलेक्टर से मुलाकात कर विभिन्न बिंदुओं पर लिखित सवाल और मांगें रखेगा। इसके साथ ही, संगठन के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे और बेतवा नदी के संरक्षण तथा पुनर्जीवन के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग करेंगे। रिपोर्ट में पीने योग्य नहीं माना गया पानी
सामाजिक कार्यकर्ता नीरज चौरसिया ने बताया कि हाल ही में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल प्राधिकरण की संयुक्त रिपोर्ट में बेतवा नदी के पानी को ‘सी श्रेणी’ का बताया गया है। इस श्रेणी का पानी पीने योग्य नहीं माना जाता है। चौरसिया ने आगे कहा कि वर्तमान में नदी कई हिस्सों में बंट चुकी है और जगह-जगह बने स्टॉप डैम तथा बैराज से इसकी प्राकृतिक धारा प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नदी में गाद जमने की समस्या गंभीर होती जा रही है, जबकि कागजों में गाद निकासी पर करोड़ों रुपए खर्च दिखाए गए हैं। शहर के कई नाले सीधे नदी में मिलकर प्रदूषण को और बढ़ा रहे हैं। बैठक में मौजूद लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते बेतवा नदी के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सामाजिक संगठन ने यह भी कहा कि यदि संतोषजनक जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो एक व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
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