डिजिटल अरेस्ट से लेकर फिशिंग के जरिए ठगी के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन अब ठगी का एक नया पैटर्न सामने आया है। इसके जरिए हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन को निशाना बनाया गया। जनवरी माह से अब तक 10 से अधिक लोग इस ठगी का शिकार हो चुके
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इनमें से केवल तीन पीड़ित कोहेफिजा थाने पहुंचे और कुल 30 हजार रुपए से अधिक की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हमीदिया अस्पताल का स्टाफ ही ठग जितेंद्र खागरे को मरीजों की जानकारी और उनके परिजन के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था। इसके बाद ठग खुद को डॉक्टर बताकर बेहतर इलाज का लालच देता और फिर क्यूआर कोड भेजकर अपने खाते में पैसे मंगवाता था।
शुक्रवार को ठगी के इस गिरोह के मुख्य आरोपी, बैतूल निवासी जितेंद्र खागरे को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार कर कोहेफिजा थाने की पुलिस को सौंप दिया। थाने से मिली जानकारी के अनुसार, ठग को गुरुवार रात इंदौर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ डॉक्टर बनकर धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्टाफ को 20% मिलता था कमीशन
सिक्योरटी एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार, ठग का नेटवर्क हमीदिया अस्पताल में तीन विभागों तक फैला हुआ था। इसमें स्त्री रोग विभाग, पीडियाट्रिक विभाग और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग शामिल हैं। जिसमें अब तक 7 स्टाफ के शामिल होने की बात तक सामने आई है। हालांकि, इन स्टाफ की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।
हालांकि, एक बात स्पष्ट हुई है कि स्टाफ ठग को जानकारी सिर्फ कमीशन के लिए दे रहे थे। हमीदिया अस्पताल की सिक्योरिटी एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार, मरीजों की फुल डिटेल (वार्ड नंबर, एड्रेस, बीमारी की विवरण), मोबाइल नंबर और मरीज की स्थिति स्टाफ मुहैया कराते थे। जिसके लिए उन्हें 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिन भी स्टाफ के नाम सामने आएंगे, उन्हें तत्काल अस्पताल से हटा दिया जाएगा। वहीं, थाना कोहेफिजा पुलिस इन स्टाफ की पहचान होने के बाद उनपर भी कार्रवाई करेगी।
पुलिस ने आरोपी जितेंद्र खागरे को गिरफ्तार कर लिया है।
पीड़ित से फोन पर बातचीत की ऑडियो आया सामने
आरोपी जितेंद्र खागरे और पीड़ित के बीच में फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। एक पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उनके बच्चे के दिल में छेद था। जिसके इलाज के लिए बच्चे को हमीदिया में भर्ती कराया था। जितेंद्र ने अस्पताल में भी डॉक्टर बनकर उनसे मुलाकात की थी।
पढ़िए… ऑडियो में क्या कहा
आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद पीड़ित परिवार और उसके बीच हुई बातचीत की ऑडियो सामने आई हैं। एक ऑडियो में आरोपी बच्चे के पिता को भरोसा दिला रहा है कि दस हजार रुपए दे दो, इससे ईको करा देंगे।
इस पर बच्चे के पिता ने जवाब दिया कि आईसीयू वाले बोल रहे हैं कि एक महीने बाद ही जांच होगी। इससे पहले नंबर नहीं आएगा।
आरोपी जवाब देता है कि आप सब छोड़ो मेरा काम करो। तत्काल करा दूंगा। यहां तक की बाद में भी आपका साथ दूंगा। घर जाने के लिए एम्बुलेंस फ्री में दिला दूंगा।
मेरे नंबर पर डेढ़ बजे तक पैसा डलवा देना। कहो तो बारकोड सेंड कर देता हूं। बच्चे का पिता जवाब देता है कि आप फिक्र मत करो डेढ़ बजे से पहले ही रकम आप तक पहुंच जाएगी, पैसा मेरे भाई के नंबर से डलवा रहा हूं।

जाल में ऐसे फंसाया, वसूले 30 हजार रुपए
हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन को ठगने का तरीका बेहद शातिर था। नेहरू नगर भोपाल निवासी नितेश विश्वकर्मा ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी किरण विश्वकर्मा गर्भावस्था के चलते हमीदिया अस्पताल में भर्ती हुई थीं। ऑपरेशन के बाद उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को हमीदिया अस्पताल का डॉक्टर बताया और कहा कि जच्चा-बच्चा दोनों खतरे में हैं, बेहतर इलाज के लिए तुरंत पैसे भेजने होंगे।
घबराए नितेश ने बताए गए यूपीआई पर 8,000 रुपए ट्रांसफर कर दिए। कुछ दिन बाद फिर कॉल आया और पत्नी की हालत गंभीर बताकर दोबारा 2,999 रुपए मंगवा लिए। बाद में कॉल बंद हो गया, तब जाकर नितेश को ठगी का शक हुआ। जांच में सामने आया कि इसी तरह विनोद अहिरवार और संजय बाटेला से भी पैसे वसूले गए। सिर्फ इन तीन पीड़ितों से ही 30 हजार रुपए से अधिक की ठगी की गई थी।
अधीक्षक डॉ. टंडन बोले- यदि कोई पैसे की मांग करे तो शिकायत करें
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने कहा कि ठगी हो तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा यदि कोई आपसे पैसे मांगे या क्यूआर कोड भेजे तो तत्काल हमीदिया अस्पताल के सिक्योरिटी सुपरवाइजर को इसकी जानकारी दें। हमीदिया में सभी मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है। कोई भी डॉक्टर किसी मरीज से अतिरिक्त पैसे की डिमांड नहीं करता है। ऐसा यदि कोई करता है, तो यह फ्रॉड है।
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हमीदिया अस्पताल।
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक खास तरीका अपनाकर ऑनलाइन ठगी की गई। शातिर ठग ने यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजन को डॉक्टर बनकर फोन किया। बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन का झांसा देकर रकम की डिमांड की। क्यूआर कोड भेजकर पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया। पढ़िए पूरी खबर।