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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23 से ज्यादा मौतों के बाद भी सरकारी दफ्तरों में लापरवाही जारी है. इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में RO बोतलबंद पानी की पैकेजिंग डेट 23 नवंबर 2024 है जबकि एक्सपायरी 90 दिन की है. 2026 में यह पानी इस्तेमाल हो रहा है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा है. प्यून ने बताया कि साहब घर से पानी लाते हैं लेकिन मीटिंग में VIP को यही दिया जाता है. जांच की मांग हो रही है.
इंदौर विकास प्राधिकरण की लापरवाही सामने आई है.
मिथिलेश गुप्ता
इंदौर. भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई 23 से ज्यादा मौतों और 1400 से अधिक लोगों के प्रभावित होने के बाद भी शहर की सरकारी एजेंसियां सबक लेने को तैयार नहीं दिख रही हैं. यह त्रासदी दिसंबर 2025 में शुरू हुई जब सीवर का पानी पीने के पानी में मिल गया जिससे डायरिया, उल्टी और डिहाइड्रेशन की महामारी फैली. अधिकारियों ने केवल 8 मौतों को आधिकारिक माना लेकिन स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौतों की संख्या 32 तक पहुंच गई. जांच में पाइपलाइन लीकेज और नगर निगम की लापरवाही सामने आई जहां एक पब्लिक टॉयलेट ऊपर होने से सीवर पानी में घुल गया.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच कमिटी बनाई लेकिन महीनों बाद भी दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई. इस घटना ने इंदौर की ‘क्लीनेस्ट सिटी’ की छवि को धक्का पहुंचाया जहां पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठे. अब इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में ही ऐसी लापरवाही सामने आई जहां RO बोतलबंद पानी की पैकेजिंग डेट 23 नवंबर 2024 है और एक्सपायरी 90 दिन की होने के बावजूद 2026 में इस्तेमाल हो रहा है. यह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है जहां बैक्टीरिया और केमिकल असंतुलन से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
CAG रिपोर्ट ने पानी प्रबंधन में गंभीर खामियां बताईं लेकिन कोई सुधार नहीं
यह लापरवाही सिर्फ IDA तक सीमित नहीं बल्कि सरकारी दफ्तरों की सामान्य प्रवृत्ति को उजागर करती है जहां करोड़ों का बजट पानी पर खर्च होता है लेकिन निगरानी की कमी से जोखिम बढ़ता है. भागीरथपुरा में मौतों के बाद CAG रिपोर्ट ने पानी प्रबंधन में गंभीर खामियां बताईं लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. IDA हर साल पानी की बोतलों पर लाखों खर्च करता है लेकिन एजेंट से पुरानी पेटियां ले ली जाती हैं. एक प्यून ने खुलासा किया कि वरिष्ठ अधिकारी घर से पानी लाते हैं जबकि मीटिंग और VIP विजिटर्स को यही एक्सपायरी पानी दिया जाता है. यह दोहरा मापदंड अधिकारियों की अपनी सुरक्षा पर फोकस और आम लोगों की अनदेखी को दिखाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायरी पानी में प्लास्टिक लीचिंग और बैक्टीरियल ग्रोथ से किडनी, लीवर समस्याएं हो सकती हैं.
भागीरथपुरा त्रासदी का बैकग्राउंड
भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में सीवर मिक्सिंग से पानी दूषित हुआ. रिपोर्ट्स के अनुसार 15 मौतें डायरिया से हुईं जबकि 200 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती हुए. CAG ने पाइपलाइन रखरखाव में लापरवाही बताई. नगर निगम ने क्लोरीनेशन बढ़ाया लेकिन देरी से.
IDA में लापरवाही का खुलासा
IDA कार्यालय में 2024 पैक RO पानी 2026 में इस्तेमाल. बोतल पर 90 दिन एक्सपायरी लिखा लेकिन अनदेखी. प्यून ने बताया एजेंट पुरानी पेटियां रख जाता है. अधिकारी घर से पानी लाते हैं लेकिन विजिटर्स को यही दिया जाता है.
स्वास्थ्य जोखिम और विशेषज्ञ राय
एक्सपायरी पानी में बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि प्लास्टिक से केमिकल लीचिंग से कैंसर जोखिम है. भागीरथपुरा जैसी घटनाओं से सबक लेकर नियमित चेकिंग जरूरी है.
सरकारी खर्च और जवाबदेही
IDA पानी पर सालाना लाखों खर्च करता है लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होती है. CAG रिपोर्ट ने पानी प्रबंधन में खामियां बताईं. दोषियों पर FIR और रिकवरी की मांग की जा रही है. लोगों ने जांच कमिटी बनाने की मांग की है. सोशल मीडिया पर अभियान चल रहे हैं, लेकिन अगर कार्रवाई नहीं हुई तो भागीरथपुरा जैसी त्रासदी दोहराई जा सकती है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें