एंटी-रेबीज लगने के बाद भी 6 साल के बच्चे की मौत, डॉक्टर बोले… डॉग बाइट कैटेगरी-3 का केस, जानें कितना खतरनाक

एंटी-रेबीज लगने के बाद भी 6 साल के बच्चे की मौत, डॉक्टर बोले… डॉग बाइट कैटेगरी-3 का केस, जानें कितना खतरनाक


Datia News: दतिया में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. 13 जनवरी को सपा पहाड़ इलाके के स्लम में खेल रहे 6 वर्षीय हंस प्रजापति को आवारा कुत्ते ने बुरी तरह काट लिया. परिजन तुरंत उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की पहली डोज लगाई. प्रोटोकॉल के अनुसार दो और डोज दी गईं. 10 फरवरी को चौथी और अंतिम डोज लगनी थी, लेकिन उससे पहले ही बच्चे की मौत हो गई. वैक्सीन लगने के बाद भी रेबीज से मौत का यह जिले का पहला मामला माना जा रहा है.

6 फरवरी को किया गया था भर्ती
जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. डीएस तोमर ने बताया, बच्चे को कुत्ते ने बुरी तरह काटा था. ये डॉग बाइट कैटेगरी-3 का केस था. इसमें सिर और शरीर पर गहरे घाव थे. 13 जनवरी असपताल आने के बाद तुरंत इलाज शुरू किया गया था. लेकिन, 6 फरवरी को उसकी हालत खराब हुई तो उसे भर्ती किया गया. जांच में रेबीज के लक्षण मिले तो ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया.

कई अस्पताल गए, फिर रास्ते में मौत
मृतक हंस के चाचा हरिराम प्रजापति ने बताया, बच्चे का एक दिन ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में इलाज चला, जहां बच्चे की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों नें हाथ खड़े कर दिए. चाचा के अनुसार, ”डॉक्टर ने कहा, भर्ती रखने से कोई फायदा नहीं है, अगर घर ले जाना चाहते हो तो ले जाओ”. इसके बाद बच्चे को ग्वालियर के 1000 बेड वाले सरकारी अस्पताल ले गए, वहां भी डॉक्टरों का वही जवाब था. फिर बच्चे को लेकर झांसी पहुंचे, जहां सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने टका सा जवाब दे दिया, तो बच्चे को दतिया लेकर आ रहे थे. रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

क्यों हुई वैक्सीन फेल? डॉक्टर का ये तर्क
डॉ. डीएस तोमर के अनुसार, डॉग बाइट टाइप 3 में कई बार एंटी रैबीज काम नहीं करती. क्योंकि, सिर, चेहरे पर बाइट से वायरस तेजी से दिमाग में फैलता है. जबकि बॉडी में एंटी डॉट बनने में एक महीने लग जाते हैं. दावा किया कि ऐसे कई केस पहले भी आ चुके हैं.

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत
मृतक के चाचा हरिराम प्रजापति ने बताया, वैक्सीन पर ही भरोसा नहीं रहा. सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है. वैक्सीन की जांच की मांग की गई है. आखिर कैसे वैक्सीन देने के बावजूद रैबीज से बच्चे की मौत हो गई?

वैक्सीन की जांच शुरू
वहीं, अस्पताल प्रशासन ने तुरंत ड्रग इंस्पेक्टर को बुलाया. वैक्सीन बैच की जांच हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद इलाज लगभग असंभव होता है. अगर काटने के तुरंत बाद पूरी डोज और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन दी जाए तो 100% बचाव संभव है. अधूरी डोज, देरी या गंभीर काट (सिर, मुंह-चेहरे पर) में कभी वैक्सीन फेल हो सकती है.



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