नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की नहर निर्माण परियोजना में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। 11 साल बाद हुए खुलासे के बाद पनागर थाने में कर्नाटक लैंड आर्मी बेंगलुरु कंपनी और यूनियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने कुंड वितरण नहर एवं वितरण नहर प्रणाली निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था। इसका ठेका मेसर्स कर्नाटक लैंड आर्मी बेंगलुरु को मिला था। नियमानुसार कंपनी ने 43 लाख 75 हजार रुपए की दो एफडीआर प्राधिकरण के नाम पर बैंक में जमा कराई थीं। कंपनी ने नहर निर्माण नहीं किया और राशि ली समय सीमा बीतने के बावजूद कंपनी ने नहर निर्माण का कार्य नहीं किया। आरोप है कि कंपनी ने प्राधिकरण के पास जमा करीब 88 लाख रुपए की ईएमडी राशि को छलपूर्वक नकदी में बदल लिया। यह मामला करीब 11 साल बाद सामने आया। जाली एफडीआर तैयार कर राशि निकाल ली इस घोटाले का खुलासा लोक लेखा समिति की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ। जांच में सामने आया कि कंपनी ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर जाली एफडीआर तैयार कर 2015 में ही राशि तुड़वा ली थी। वर्ष 2023 में जब प्राधिकरण ने कार्य नहीं करने वाली कंपनी की एफडीआर राशि राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की और यूनियन बैंक शाखा प्रबंधक को एफडीआर भुनाने के लिए पत्र लिखा, तो बैंक की ओर से खाता नंबर नहीं मिलने की बात कहकर मामला टाल दिया गया। इसके बाद प्राधिकरण ने पनागर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की जांच के बाद मामला दर्ज पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर केवी मलैश ने तत्कालीन बैंक अधिकारी से सांठगांठ कर एफडीआर तुड़वाई थी। इसके आधार पर पुलिस ने कंपनी मैनेजर और बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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