नोट छापने की मशीन है ये आदिवासी चीज, इंटरनेशनल डिमांड, बीपी-दमा के लिए रामबाण

नोट छापने की मशीन है ये आदिवासी चीज, इंटरनेशनल डिमांड, बीपी-दमा के लिए रामबाण


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Balaghat harra international demand : बालाघाट जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉक्टर निलय जैन का कहना है कि जितनी भी कड़वी वनस्पति होती है, वह मानव शरीर के लाभदायक होती है. ऐसी प्रकृति हर्रा की होती है. ऐसे में इसका सेवन करने से मानव को बेहद लाभ होते हैं. यह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती है.

Balaghat News : मध्य प्रदेश के बालाघाट में तमाम तरह की वनस्पतियां मौजूद है. यहां पर 53 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है. ऐसे में बालाघाट के आदिवासी अंचल में लोगों की आय का जरिया बन गया है. ऐसे में आदिवासी अंचल के लोग अलग-अलग सीजन में वनों से निकलने वाले उपज को इकट्ठा कर स्थानीय व्यापारियों को बेचते हैं और अपनी जीविका चलाते हैं. लेकिन इन उपज की डिमांड अंतरराष्ट्रीय मार्केट में है, जिससे कई तरह की दवाइयां बनाई जाती है. इन्हीं में से एक है हर्रा, जिसे जादुई कहने में कोई समस्या नहीं होगी. दरअसल, बालाघाट जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर निलय जैन ने हर्रा के विषय में कई जानकारियां दी.

जितनी वनस्पति कड़वी जीवन के लिए अच्छी
बालाघाट जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉक्टर निलय जैन का कहना है कि जितनी भी कड़वी वनस्पति होती है, वह मानव शरीर के लाभदायक होती है. ऐसी प्रकृति हर्रा की होती है. ऐसे में इसका सेवन करने से मानव को बेहद लाभ होते हैं. यह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती है.

हर्रा एक बेहद महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है. यह मानव के लिए मल्टी विटामिन और मल्टी न्यूट्रैंट होता है. इससे कई तरह के फायदे होते हैं. इसके सेवन से बीपी और शुगर कंट्रोल होता है. सांस की समस्या जैसे दमा ठीक होता है. शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है.

बच्चों की बनती है घूट्टी
हर्रा को पहले के जमाने में घूट्टी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे में उन्हें गैस और कब्ज की समस्या नहीं होती है. डॉक्टर निलय जैन ने बताया कि जिले से हर्रा सहित कई आयुर्वेदिक वनस्पति का निर्यात होता है.

आदिवासियों के नोट छापने की मशीन है हर्रा
सुकचंद टेकाम बताते हैं कि पूरे गांव के लोग हर्रा चुनने जाते हैं. इसके बाद तोड़ते हैं और सुखाते है और इसे लोकल मार्केट में बेच देते हैं. वहीं, आयुर्वेदिक दवा उद्योग में इसकी भारी डिमांड होती है. ऐसे में कंपनियां बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी करते हैं. वहीं, लोकल लेवल पर समूह बनाकर इसकी प्रोसेसिंग कर पाउडर बनाकर या फिर गुड़ सहित दूसरी चीजों में मिलाकर लघु उद्योग शुरू कर सकते हैं.

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Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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