प्याज के एक पौधे में हुआ तो पूरी फसल को तबाह कर देगा ये रोग, नहीं बढ़ेगा कंद, एक्सपर्ट ने बताया इलाज

प्याज के एक पौधे में हुआ तो पूरी फसल को तबाह कर देगा ये रोग, नहीं बढ़ेगा कंद, एक्सपर्ट ने बताया इलाज


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Onion Cultivation Tips: प्याज किसानों को रबी सीजन में कंद का आकार नहीं बढ़ने की समस्या से जूझना पड़ रहा है. फरवरी में मौसम बदलाव के कारण लीफ ब्लाइट जैसी फंगल बीमारी तेजी से फैलती है. इससे पत्तियां सूख जाती हैं और कंद को पोषण नहीं मिल पाता. एक्सपर्ट से जानें इसका उपाचार…

Agri Tips: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में किसान रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर और सरसों के साथ-साथ अब तेजी से प्याज की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. फरवरी का महीना प्याज की फसल के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी समय पौधों में कंद बनना शुरू हो जाता है. लेकिन, मौसम परिवर्तन के कारण इस महीने में रोगों का खतरा भी सबसे ज्यादा रहता है.

किसान सलाहकार अनुपम चतुर्वेदी ने लोकल 18 काे बताया कि फरवरी में प्याज की फसल में लीफ ब्लाइट नामक बीमारी तेजी से फैलती है. यह एक गंभीर फंगल रोग है, जो समय पर नियंत्रण न होने पर पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. इस बीमारी का असर प्याज की पत्तियों से लेकर कंद तक दिखाई देता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

पत्तियों में दिखते हैं धब्बे
अनुपम चतुर्वेदी ने बताया कि लीफ ब्लाइट की पहचान शुरुआती स्तर पर करना बेहद जरूरी है. इस रोग में प्याज की पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं. धीरे-धीरे पत्तियां सूखकर झड़ने लगती हैं. पत्तियों के झड़ने से पौधे में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे कंद को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. इसका सीधा असर प्याज के आकार और पैदावार पर पड़ता है.

बीमारी का एक से दूसरे पौधे में फैलाव
एक्स्पर्ट के अनुसार लीफ ब्लाइट एक पौधे से दूसरे पौधे में तेजी से फैलने वाली बीमारी है. खासकर जब फसल बढ़वार की अवस्था में होती है, तब इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है. इस रोग से प्रभावित प्याज न सिर्फ खेत में नुकसान पहुंचाती है, बल्कि भंडारण के दौरान भी जल्दी खराब हो जाती है, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ता है.

इस उपचार से मिलेगी राहत
आगे बताया, प्याज की फसल पर बायोफंगीसाइड का प्रयोग कारगर साबित हो सकता है. इसके लिए 2 मिलीलीटर मंगोजेप को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसके साथ ही 2 मिलीलीटर नीम ऑयल को 1 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करने से भी रोग के प्रकोप को रोका जा सकता है. ये उपाय रासायनिक दवाओं की तुलना में सुरक्षित और अधिक प्रभावी माने जाते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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