90 साल पहले पीपल के नीचे रखी थी बजरंगबली की मूर्ति, 8 दिन के बाद हिली ही नहीं, अब यहां भव्य मंदिर

90 साल पहले पीपल के नीचे रखी थी बजरंगबली की मूर्ति, 8 दिन के बाद हिली ही नहीं, अब यहां भव्य मंदिर


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Khargone Data Hanuman Mandir: इस मंदिर को लेकर सबसे बड़ी मान्यता ये कि मंदिर में मौजूद हनुमानजी की प्रतिमा कहीं और स्थापित की जानी थी. रास्ते में शाम हो जाने के कारण प्रतिमा को यहां पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया गया. अगले दिन भक्तों ने यहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी. फिर जो हुआ…

Khargone News: खरगोन शहर के बीचोबीच स्थित ‘श्री दाता हनुमान मंदिर’ आज आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. यह मंदिर जितना भव्य नजर आता है, उससे कहीं ज्यादा रोचक इसकी स्थापना की कहानी है. कहा जाता है कि सालों पहले जब यहां केवल पीपल का पेड़ था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि ये स्थान आगे चलकर हनुमान भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा. लेकिन, प्रभु की महिमा ऐसी हुई कि आज भी सुनकर लोग दंग रह जाते हैं.

श्री दाता हनुमान मंदिर को लेकर सबसे बड़ी मान्यता ये कि यहां मौजूद हनुमानजी की प्रतिमा कहीं और स्थापित की जानी थी. रास्ते में शाम हो जाने के कारण प्रतिमा को यहां पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया गया. अगले दिन भक्तों ने यहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी. आठ दिन बाद जब प्रतिमा को यहां से हटाने का प्रयास किया गया, तो वह अपनी जगह से हिली तक नहीं. सभी ने इसे हनुमानजी की इच्छा माना और यहीं स्थापना का फैसला लिया गया.

90 साल पुराना मंदिर
पुजारी पंडित गोपाल कृष्ण जोशी बताते हैं कि यह मंदिर करीब 90 साल पुराना है. स्व. गुलाब जर्मन और स्व. सुरेशचंद्र व्यास ने भगवान की स्थापना करवाई थी. विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां नियमित पूजा शुरू हुई. शुरुआती समय में भक्तों ने मिलकर एक छोटी सी डेरी बनाई थी. धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी और जन सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. अब दूर-दूर से भक्त श्री दाता हनुमान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां चोला चढ़ाते हैं. मंदिर में 32 साल से अखंड ज्योत जल रही है. हर मंगलवार को सुंदरकांड पाठ होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. माना जाता है कि यहां हनुमानजी दिन में तीन रूपों में दर्शन देते हैं. सुबह बाल रूप, दोपहर में युवा रूप और शाम को वृद्ध रूप में की अनुभूति होती है.

मंदिर में राम-राम बैंक 
इस मंदिर की एक और खास पहचान है. यहां अनोखा राम-राम बैंक है. इसमें भक्त रुपये-पैसे की जगह 108 बार राम नाम लिखकर पर्ची जमा करते हैं. अब तक करीब 4 लाख से ज्यादा पर्चियां जमा हो चुकी हैं. मंदिर समिति का लक्ष्य एक करोड़ राम नाम संग्रह करने का है. पंडित गोपाल जोशी के अनुसार मंदिर आने वाले हर भक्त को नि:शुल्क पेन और पर्ची दी जाती है, ताकि वे एकाग्र होकर राम नाम लिख सकें.

एक ही मंदिर में तीन देवताओं का संगम
यह मंदिर इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां एक ही परिसर में तीन देवता अपने-अपने ईष्टों के साथ विराजमान हैं. यहां हनुमानजी के साथ श्रीराम का दरबार है और श्रीराम के ईष्टदेव भगवान शिव पशुपतिनाथ भी मौजूद हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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