स्पोर्ट्स डेस्क36 मिनट पहले
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टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में अंपायरिंग से जुड़ा एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बार हर रन-आउट अपील के लिए थर्ड अंपायर की मदद नहीं ली जा रही है।
जिन मामलों में रन-आउट साफ और स्पष्ट नजर आता है, वहां फील्ड अंपायर खुद ही आउट या नॉट-आउट का फैसला सुना रहे हैं। ICC ने यह बदलाव मैच की रफ्तार बनाए रखने और अंपायरिंग फैसले को और ज्यादा इम्पैक्टफुल बनाने के लिए किया है।

टी-20 वर्ल्ड कप के 7वें मैच में इटली के गेंदबाज स्कॉटलैंड के ब्रेंडन मैकमुलेन को रनआउट करते हुए।
इसे दो उदाहरण से समझिए…
1. उस्मान-शाहीन कन्फ्यूजन, तुरंत दिया गया फैसला
अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान की पारी के आखिरी ओवर में लगातार दो रन-आउट देखने को मिले। 19.4 ओवर में सौरभ नेत्रवलकर ने ऑफ स्टंप के बाहर फुल लेंथ गेंद डाली। उस्मान खान बल्ला नहीं लगा सके और गेंद सीधे विकेटकीपर के पास चली गई। इसी बीच शाहीन अफरीदी ने सिंगल के लिए कॉल कर दिया।
उस्मान ने रिस्पॉन्स नहीं किया और दोनों बल्लेबाज एक ही छोर पर पहुंच गए। स्थिति बिल्कुल साफ थी, बल्लेबाज क्रीज से बाहर थे। फील्ड अंपायर ने बिना किसी रेफरल के तुरंत उस्मान को रन-आउट दे दिया।
2. तीसरे रन का जोखिम, अबरार आउट
19.6 ओवर में पाकिस्तान को एक और झटका लगा। इस बार शाहीन अफरीदी ने फुल डिलीवरी को डीप मिड-विकेट की ओर स्लॉग किया। 2 रन आसानी से पूरे हो गए, लेकिन तीसरे रन की कोशिश में जोखिम भारी पड़ गया।
डीप मिड-विकेट से तेज थ्रो सीधे कीपर एंड पर आया। शाहीन ने रन पूरा किया, लेकिन स्ट्राइकर एंड पर मौजूद अबरार अहमद क्रीज में नहीं पहुंच सके। विकेटकीपर ने गेंद स्टंप्स को मारी और फील्ड अंपायर ने आउट का फैसला सुना दिया।

पाकिस्तान के अबरार अहमद शून्य के स्कोर पर रनआउट हो गए।
पहले लगभग हर अपील जाती थी थर्ड अंपायर के पास
पुराने नियम में रन-आउट की लगभग हर अपील थर्ड अंपायर को रेफर कर दी जाती थी। फील्ड अंपायर सीधे टीवी अंपायर की मदद लेते थे और रिप्ले देखकर अंतिम फैसला सुनाया जाता था। इससे कई बार ऐसे मामलों में भी खेल रुकता था, जहां नतीजा पहले से स्पष्ट होता था।

पहले अधिकतर रन-आउट अपील थर्ड अंपायर के पास जाती थी।
अब जिम्मेदारी हालात के हिसाब से दी
नए सिस्टम में जिम्मेदारी को सिचुएशन के हिसाब से बांटा गया। अगर बल्लेबाज क्रीज से काफी बाहर हो, बैट लाइन के पीछे न पहुंचा हो, थ्रो के समय स्थिति साफ दिख रही हो, ऐसे में फील्ड अंपायर बिना रेफरल के फैसला दे सकता है।
लेकिन अगर मामला करीबी हो, बैट हवा में था या जमीन पर, बेल्स कब गिरीं, फ्रेम-टू-फ्रेम जांच की जरूरत हो तो निर्णय थर्ड अंपायर को भेजा जाता है।

मैच की रफ्तार पर दिखा असर
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर मैच की गति पर पड़ा है। अनावश्यक रेफरल कम होने से समय की बचत हो रही है और मैच का नैचुरल टेम्पो बना रहता है। ICC का मानना है कि स्पष्ट मामलों में ऑन-फील्ड निर्णय खेल को ज्यादा फ्लो में रखता है, जबकि करीबी फैसलों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल संतुलन बनाए रखता है।
हालांकि, इस प्रयोग को लेकर बहस भी जारी है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के दौर में हर रन-आउट को स्क्रीन पर देखना ज्यादा सुरक्षित तरीका हो सकता है, क्योंकि इससे मानवीय गलती की संभावना कम हो जाती है।

USA की टीम उस्मान खान को आउट करने के बाद सेलिब्रेट करती हुईं।
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